उत्तराखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग को चिट्ठी भेजी है. जिसमें कहा गया है कि सीमा विस्तार से लेकर परिसीमन और आरक्षण संबंधी सारी अधिसूचनाएं वह 10 अप्रैल तक जारी कर देगी, हालांकि इसमें ये शर्त भी जोड़ी गई है कि यह तब संभव हो पाएगा जबकि कोई कानूनी अड़चन पेश नहीं आएगी.
सरकार 29 या 30 अप्रैल को नगर निकाय चुनाव कराने के बीच फंसी है. दबाव इस बात है कि तीन मई तक सारे निकाय बोर्ड अस्तित्व में आने हैं. सरकार एक दिन के लिए भी प्रशासक बैठाए जाने के विकल्प से बचना चाह रही है.
निकाय चुनाव के लिए बनी अजीबोगरीब स्थिति के बीच गेंद इस वक्त सरकार के पाले में है. सरकार को सीमा विस्तार पर हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए ये भी देखना है कि कोई गड़बड़ ना रह जाए.
इसके साथ ही निर्वाचन आयोग को भी चुनाव के कार्यक्रम में अपनी राय से अवगत कराना है. शनिवार को भी निकाय चुनाव की तैयारियों के लिए बैठक हुई. जिसमें नगर विकास मंत्री मदन कौशिक से लेकर सचिव नितेश झा ने अफसरों से चुनाव की तैयारियों पर बात की.
सूत्रों के अनुसार सरकार तीन अप्रैल को अपनी ओर से चुनाव खांका खींचकर निर्वाचन आयोग को भेज सकती है. जिस तरह से सरकार ने सामान्य स्थितियों में 10 अप्रैल तक सारी अधिसूचनाएं कर लेने की बात कही है उससे निर्वाचन आयोग असहज हो सकता है. क्योंकि उसे चुनाव कराने के लिए अपेक्षित समय नहीं मिल पा रहा है.
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुवर्द्धन का कहना है कि हम संसोधित कार्यक्रम का इंतजार कर रहे हैं. दूसरी तरफ शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि चुनाव निर्धारित तय समय पर ही होंगे.


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