गुरुवार को देहरादून नगर निगम की अंतिम बोर्ड बैठक का बहिष्कार करना कांग्रेस पार्षदों को बहुत महंगा पड़ गया. कांग्रेस के बहिष्कार के बाद न सिर्फ बिना हंगामे के कई प्रस्ताव पारित हुए, बल्कि एक ऐसा प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया, जिसमें सिर्फ़ उपस्थित पार्षदों को विकास कार्यों के लिए 15-15 लाख रुपए जारी किए जाएंगे.
नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना से पहले देहरादून नगर निगम की आखिरी बोर्ड बैठक हुई. निगम में बने नए सभागार में इस बैठक में निगम द्वारा अब तक के कार्यों का लेखा-जोखा रखा गया. साथ ही बैठक में कई प्रस्ताव पारित हुए.
इनमें सबसे बड़ा प्रस्ताव निगम में जुड़े नए क्षेत्रों को 10 साल तक कर मुक्त रखने का रहा. हाल ही में मुख्यमंत्री ने स्थानीय निकाय विस्तार के संबंध में इसका एलान किया था.
इसके अलावा नई दरों से लगने वाले टैक्स के लिए बैठक में कमेठी का गठन किया गया, शहर के कई चौराहों का नाम बदल दिया गया, थत्यूड़ के लिए मसूरी डाइवर्ज़न से बस स्टैंड के लिए भूमि स्वीकृत, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए हुए टेंडर के एग्रीमेंट के लिए अनुमोदन, हाउस टैक्स में बढ़ोत्तरी के लिए अब निगम GIS बेस व्यवस्था करेगा लागू, यूजर कलेक्शन को बढ़ाने के लिए अन्य एजेंसियों का सहारा लिया जाएगा.
लेकिन जिस प्रस्ताव ने राजनीतिक खलबली मचा दी है वह है सिर्फ़ बोर्ड बैठक में उपस्थित पार्षदों को ही विकास कार्यों के लिए धनराशि जारी करने का. कांग्रेस पार्षदों के बहिष्कार के बीच बोर्ड ने बैठक में मौजूद पार्षदों को ही विकास कार्यों के लिए 15-15 लाख रुपए जारी करने का फ़ैसला किया.
मेयर विनोद चमोली कहते हैं कि विपक्ष की विकास में रुचि नहीं है और सर्वसम्मति से यह फ़ैसला पारित किया गया है जो नगर हित में है.
ज़ाहिर है विपक्ष इससे उखड़ गया है. निगम में नेता प्रतिपक्ष नीनू सहगल ने इस बोर्ड बैठक को औपचारिकता बताया और सदन में उपस्थित सदस्यों को ही 15 लाख रुपए का अनुमोदन देने को लोकतंत्र और न्याय के ख़िलाफ़ बताया.
निगम की अंतिम बोर्ड मीटिंग में राजनीतिक लिहाज को भी दरकिनार कर दिया गया क्योंकि अब चुनावी जंग में तो भिड़ना ही है. लेकिन सवाल यह है कि जब निकाय चुनाव सिर पर हैं और पुराने काम ही पूरे नहीं हुए हैं तो छांट कर दिए गए यह 15 लाख रुपए खर्च कैसे होंगे?


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