अल्मोड़ा जिले के दर्जनों अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं और ये फॉर्मासिस्टों के सहारे चल रहे हैं. जिला मुख्यालय के अस्पतालों में भी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी हैं इसकी वजह से मरीजों को निजी अस्पतालों या फिर मैदानी क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है.
डॉक्टरों की कमी पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जंग छिड़ गई है और दोनो पार्टियों के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं.
केन्द्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा का कहना है कि राज्य में पहले स्वास्थ्य की स्थिति ठीक नहीं थी क्योंकि राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी रही है. अब राज्य सरकार डॉक्टरों की कमी दूर करने की कोशिश कर रही है.
अजय टम्टा ने दावा किया कि पहले भारी अव्यवस्था थी और डॉक्टर पहाड़ों में नहीं मैदानी क्षेत्रों में ही रहते थे. सरकार डॉक्टरों को पहाड़ की ओर भेजने की पूरी कोशिश कर रही है. एमबीबीएस पास कर बने नए डॉक्टरों को भी पहाड़ों में तैनाती दी जा रही है.
बीजेपी नेता ने यह भी दावा कि अल्मोड़ा, बागेश्वर की डिस्ट्रिक्ट मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक में उन्हें पता चला है कि दोनों ज़िलों में डॉक्टरों की संख्या पहले के मुकाबले कुछ बढ़ी है.
लेकिन कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं. वह कहते हैं कि ज़िला मुख्यालय तक में एक या दो डॉक्टर ही हैं, अगर वह छुट्टी पर चले जाते हैं तो व्यवस्था चौपट हो जाती है.
कांग्रेस सांसद के अनुसार यह विडंबना ही है कि चार धाम यात्रा मार्ग पर मुख्यमंत्री हर एक किलोमीटर पर एक डॉक्टर होने का दावा कर रहे हैं लेकिन राज्य के ज़िला मुख्यालयों तक में डॉक्टर नहीं हैं.


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