ऋषिकेश। सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट में थोड़ा सा बदलाव की बात क्या की अपने हक के लिये पूरी दलित कौम एक हो गयी व मजबूर होकर केन्द्र सरकार नें सुप्रीम कोर्ट में इस एक्ट पर पुर्नविचार करने की याचिका दायर कर दी। अगर सर्वोच्च न्यायालय इस एक्ट में पुर्नविचार कर बदलाव करता है तो फिर ये देश के लिये सही नहीं होगा।
आज इस पूरे प्रकरण से उत्तराखण्ड आन्दोलन की याद आ गयी, उत्तराखण्ड आन्दोलन में भी एकता थी मगर हम पहाड़ियों नें पूरा आन्दोलन को हिंसक नहीं होने दिया, बल्कि हम खुद षडयंत्र का शिकार हुये, हमारी 42 सहादतें, हमारी मां, बहनों के साथ जो कृत्य हुआ शायद ही कोई इसे भूला होगा। भाजपा, कॉग्रेस, सपा, बसपा कोई नहीं चाहता था कि ये राज्य बनें। मगर मातृ शक्ति के आगे व एकजुटता देख मजबूरी में ये राज्य हमें देना पड़ा। या यूं कहूं हमने ये राज्य छीना है। मगर दुर्भाग्य देखिये हमें षड़यंत्र के तहत एक अपंग राज्य पकड़ा दिया गया जिसमें ना जल, ना जंगल, ना जमीन ना बिजली हमारी सम्पत्ति हमारी अधिकार उत्तर प्रदेश का।
आज बहुत अच्छा लगता है जब इन राष्ट्रीय पार्टियों से त्रस्त होकर क्षेत्रिय पार्टी यूकेड़ी अपने अधिकारों के लिये सड़कों पर है। मगर दुख इस बात का है कि हम पहाड़ी उनका साथ ना देकर इन राज्य विरोधियों के साथ खड़े हैं। आज हम अपने हक के लिये, युवा रोजगार के लिये सड़कों पर पिट रहा है, क्यों हमें ऐसा ही राज्य चाहिये था? हम पहाड़ियों को कल के आन्दोलन से सीख लेना चाहिये कि अपने पहाड़ को मजबूत करना है तो पहाड़ियों को एकता, एकजुटता दिखानी होगी, हम कब जागेगें पता नही। क्या जब सहारनपुर, बिजनौर हमारे पहाड़ में शामिल हो जायेगे तब? मैंकल की हिन्सा की घौर निन्दा करता हूं, आरक्षण व सब्सिड़ी ये खत्म होना चाहिये देश तभी उन्नती कर पायेगा! ये आन्दोलन शान्ति से भी हो सकता था! मगर दलितों में एकता को देखकर एक बात नें सोचने को मजबूर कर दिया कि हम पहाडियों में ऐसी एकता कब होगी, अपनी कौम के लिये हम ऐसी एकता कब दिखायेगे।
आज फिर अपने पहाड़ी हक हकूक के लिये हमें एक ऐसे ही आन्दोलन की जरूरत है। आवों सब मिलकर अपनी ताकत दिखाये व अपने हक हासिल करें।

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