ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में पार्किंसन सप्ताह के उपलक्ष्य में पार्किंसन बीमारी पर् जन स्वास्थ्य व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमे एम्स के विद्यार्थियों, फैक्लटी के साथ साथ मरीजो ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। कार्यक्रम में दिल्ली एम्स के न्यूरोलोजी विभाग के प्रोफेसर डॉ विनय गोयल ने पार्किंसन की बीमारी के बारे में बताया कि सामान्यत इसे कम्पन की बीमारी के रूप में भी जाना जाता है। तीन प्रतिशत लोगो मे हाथ पावँ में अकड़न भी आ जाती है और कम्पन एक तरफ से होता है। सबसे खास बात ये की हाथ या पावँ की कम्पन तभी होती है जब मरीज कोई काम नहीं कर रहा होता है, इसलिए इस बीमारी में ये जरूरी है कि मरीज काम करना न छोड़े। डॉ गोयल ने बताया कि उनके कई पेशेंट ऐसे है जो रेगूलर 3 से 5 किलोमीटर चलते है और उन्हें दवा की मात्रा भी कम हो गई। नियमित व्यायाम , योग तथा जॉगिंग से भी दवा की आवश्यकता कम पड़ती है। 
उन्होंने बताया कि पार्किंसन की बीमारी बढ़ने पर् दवाई की मात्रा बढ़ानी पड़ती है पर् उसकी भी एक सीमा होती है क्योंकि दवा के साइड इफ़ेक्ट भी होते हैं अतः ऐसे में डी बी एस ( डीप ब्रेन स्टिमुलेशन) सर्जरी करनी पड़ती है, जिससे मरीज काफी हद तक रिकवर हो जाता है। किन्तु आज की तारीख में यह सर्जरी काफी महँगी है अतः हर कोइ इसे अफफोर्ड नही कर सकता। डॉ गोयल ने उपस्थित मरीजो की शंका का समाधान भी किया।
कार्यक्रम के अंत मे डीन सुरेखा किशोर ने डॉ विनय गोयल को स्मृति चिन्ह भेंट किया तथा उपस्थित फैक्लटी सदस्य प्रो जया चतुर्वेदी, डॉ मुकेश त्रिपाठी, डॉ संजीव कीशोर, डॉ बृजेंद्र सिंह, डॉ सुरेश शर्मा के साथ तमाम मरीजो का आभार व्यक्त किया।

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