ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में उत्तराखंड के राज्यपाल डॉक्टर के के पॉल ने पांच दिनों तक चलने वाले मेडिकल और डेंटल कॉलेज के छात्रों के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा महोत्सव "पायरेक्सिया" का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की शुरुआत में एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने एम्स की उपलब्धियों को गिनाया और बताया कि जल्द ही एम्स में 35 ऑपरेशन थिएटर कार्यरत हो जाएंगे तथा एम्स के बेड की क्षमता बढ़कर 960 हो जाएगी । उन्होंने एम्स में उपलब्ध नवीनतम प्रणाली के चिकित्सा उपकरण एवं विभागों की जानकारी भी दी । ऐम्स में चल रहे परास्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए छात्रों के बढ़ते रुझान के बारे में बताया। राज्यपाल ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि डॉक्टरों को भविष्य में आईक्यू के साथ-साथ के
ई.क्यू . अर्थात इमोशनल कोटेन्ट भी उच्च रखना होगा ताकि जब वह यहां से शिक्षा प्राप्त करके बाहर निकलें तो एक मानवीय अप्रोच के साथ अपनी सेवाएं दें एवं अपने कैरियर के ट्रांसफॉर्मेशन में ह्यूमन वैल्यू को सर्वोच्च स्थान दें । उन्होंने कहा कि एम्स के सभी निदेशकों से उनका मिलना रहा है चाहे वह डॉक्टर राजकुमार हो हे डॉक्टर संजीव मिश्रा लेकिन प्रोफेसर रविकांत के समय में एम्स ने उल्लेखनीय तरक्की की है । उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही एम्स ऋषिकेश एम्स दिल्ली के बाद चिकित्सा जगत में पहला नाम हुआ होगा ।
डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ मनोज गुप्ता ने कहा की इस तरह के आयोजन से विद्यार्थियों की न सिर्फ संगठनात्मक क्षमता बल्कि उन्हें टीम के रुप में कार्य करने कि भावना भी बढ़ती है और वह परस्पर सहयोग से कार्य करते हैं । खेल और कंपटीशन प्रतियोगिताओं में हार और जीत तो होती ही है किंतु हार को एक चुनौती के रूप में लेना और जीत को विनम्रता से स्वीकार करना इस तरह के इवेंट से सीखा जा सकता है ।
कार्यक्रम में डीन प्रो सुरेखा किशोर चीफ प्रोवोस्ट प्रोफेसर सौरव वार्ष्णेय एवं अन्य वरिष्ठ संकाय सदस्य अधिकारी तथा विद्यार्थी मौजूद थे ।
ई.क्यू . अर्थात इमोशनल कोटेन्ट भी उच्च रखना होगा ताकि जब वह यहां से शिक्षा प्राप्त करके बाहर निकलें तो एक मानवीय अप्रोच के साथ अपनी सेवाएं दें एवं अपने कैरियर के ट्रांसफॉर्मेशन में ह्यूमन वैल्यू को सर्वोच्च स्थान दें । उन्होंने कहा कि एम्स के सभी निदेशकों से उनका मिलना रहा है चाहे वह डॉक्टर राजकुमार हो हे डॉक्टर संजीव मिश्रा लेकिन प्रोफेसर रविकांत के समय में एम्स ने उल्लेखनीय तरक्की की है । उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही एम्स ऋषिकेश एम्स दिल्ली के बाद चिकित्सा जगत में पहला नाम हुआ होगा ।
डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ मनोज गुप्ता ने कहा की इस तरह के आयोजन से विद्यार्थियों की न सिर्फ संगठनात्मक क्षमता बल्कि उन्हें टीम के रुप में कार्य करने कि भावना भी बढ़ती है और वह परस्पर सहयोग से कार्य करते हैं । खेल और कंपटीशन प्रतियोगिताओं में हार और जीत तो होती ही है किंतु हार को एक चुनौती के रूप में लेना और जीत को विनम्रता से स्वीकार करना इस तरह के इवेंट से सीखा जा सकता है ।
कार्यक्रम में डीन प्रो सुरेखा किशोर चीफ प्रोवोस्ट प्रोफेसर सौरव वार्ष्णेय एवं अन्य वरिष्ठ संकाय सदस्य अधिकारी तथा विद्यार्थी मौजूद थे ।


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