श्रीमती महाजन ने विदाई से पूर्व परमार्थ प्रांगण में किया रूद्राक्ष का पौधे का रोपण
पूज्य स्वामी जी महाराज के सान्निध्य में स्वच्छ भारत, हरित भारत का संकल्प कराकर ली विदाई
श्रीमती महाजन के सम्मान में बनेगा सम्मान वाटिका 
सद्भाव, समता और समसरता का मिश्रण भारत के डीएनए मंे है समाहित-: 
स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 13 अप्रैल। भारतीय लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन जी आज परमार्थ निकेतन से विदा हुई। जाने से पूर्व श्रीमती महाजन ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों के साथ मिलकर परमार्थ निकेतन प्रांगण में शिवत्व के प्रतीक रूद्राक्ष के पौधे का रोपण किया।
श्रीमती महाजन जी ने दो दिनों तक परमार्थ निकेतन में रहकर योग, ध्यान, श्रीमद् भागवत कथा, दिव्य गंगा स्नान और विश्व प्रसिद्ध माँ गंगा की आरती में सहभाग किया। माँ गंगा के तट पर उन्होने अपने जीवन का 75 वाॅ जन्मदिन मनाया। श्रीमती महाजन जी के जन्मदिवस के अवसर पर गंगा तट पर आयोजित सम्मान समारोह में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने 75 रूद्राक्ष के पौधों का रोपण करने एवं ’सम्मान वाटिका’ की घोषणा की।  
श्रीमती महाजन ने दो दिनों तक इस दिव्य वातावरण में रहने के बाद आज जाते हुये प्रसन्नता व्यक्त कि और कहा की यहां बिताया प्रत्येक क्षण दिव्यता से युक्त था। उन्होने कहा कि परमार्थ निकेतन मेरा प्रार्थना प्रांगण है; अब तो यह मेरा आंगन है।
परमार्थ से विदा लेने से पूर्व श्रीमती महाजन ने परमार्थ निकेतन में प्रतिष्ठित कचरा खाऊ मशीन फिल्म का अवलोकन किया। स्वामी जी महाराज ने कचरा निस्तारण मशीन के विषय में जानकारी देते हुये बताया कि देश में दो, तीन या कई मोहल्लों को मिलाकर एक मशीन लगा सकते है जिससे  बेहतर तरीके से कचरे का निस्तारण कर पर्यावरण को संरक्षित किया जा सकता है। साथ ही पूज्य स्वामी जी महाराज ने पराली से बनाये जा रहे ’’एग्री बोर्ड’’ के विषय में शार्ट फिल्म दिखाकर श्रीमती महाजन जी को जानकारी दी और कहा कि इससे पूरे देश में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का 2 करोड़ घर बनाने का जो सपना है एक हद तक पराली से बने बोर्ड के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। इससे पराली भी बचेगी, प्रदूषण से भी बचेंगे, पर्यावरण भी बचेगा और पृथ्वी भी बचेगी इससे किसान खुश और धरती भी खुश होंगे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने स्वच्छता के साथ-साथ सद्भाव, समता और समसरता का जो मिश्रण भारत के डीएनए मंे समाहित है उसे बचाये रखने पर भी चर्चा करते हुये कहा कि भारत में रहने वाला हर भारत वासी इस विशाल देश का एक अंग है इसके बिना भारत अधूरा है। स्वामी जी ने कहा कि हमे सबको गले लगाकर सभी को आगे बढ़ाना है; हमें सब को साथ लेकर चलना है। इस राष्ट्र में रहने वाला हर नागरिक समान है कोई ऊंच-नीच, बड़ा-छोटा नहीं है संविधान ने सभी को समान अधिकार प्रदान किये हैं।
विगत कुछ दिनों से ऋषिकेश के गंदे नालों के उपर बनी एक शार्ट फिल्म प्रसारित हो रही है, उस पर भी स्वामी जी महाराज ने श्रीमती महाजन जी से चर्चा की और कहा कि लगभग एक माह के भीतर ही इस पर कार्य किया जायेगा ताकि ये गंदा नाला अब गंगा जी में इस तरह से न गिरे। अनेक सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक विषयों पर चर्चा के दौरान इस यात्रा को अत्यंत यादगार बताते हुये श्रीमती महाजन ने परमार्थ निकेतन से विदा ली। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने पेड़ लगाकर उनके मंगल स्वास्थ्य की कामना की।

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