ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में पिछले 15 दिनों से चले आ रहे स्वच्छता पखवाडे का समापन समारोह केंद्रीय सचिव स्वास्थ्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अपर सचिव डॉ राकेश वत्स की उपस्थिति में संपन्न हुआ । स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 1 से 15 अप्रैल तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया जा रहा था । इस दरमियान एम्स ऋषिकेश द्वारा अस्पताल, कॉलेज, आवासीय परिसर और हॉस्टल में गहन स्वच्छता अभियान चलाया गया । जिसके अंतर्गत डॉक्टरों, अफसरों, कर्मचारियों एवम मरीजों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया और स्वच्छता से स्वास्थ्य कैसे प्राप्त हो सकता है यह बताएं गया । इस में हैंड हाइजीन , इन्फेक्शन कंट्रोल, परिसर की स्वच्छता तथा बायो मेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण इन बातों पर जोर दिया गया।
अस्पताल के विभिन्न ओपीडी एवं आईपीडी वार्डों में से सबसे स्वच्छ आईपीडी एवं ओपीडी का चयन किया गया जिसमे गायनाकोलॉजी और रेडियोथेरेपी विभाग ने बाजी मारी। इस अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले सफाई कर्मियों को भी पुरस्कृत किया गया ।
समापन समारोह में बोलते हुए एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने कहा की स्वच्छता सिर्फ एक पखवाड़े तक सीमित न रहकर सतत चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए। इससे न सिर्फ इन्फेक्शन कंट्रोल होता है बल्कि दवाइयां और इलाज पर होने वाले खर्च में भी कटौती होती है । स्वच्छता की आदत हमें बच्चों में बचपन से डालनी चाहिए ताकि वह बड़े होकर इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना सकें । स्वच्छता का तात्पर्य न सिर्फ अपने घर को साफ रखना है बल्कि अपने घर के आसपास के एक-एक घर को भी साफ रखना भी है। अगर हर कोई स्वच्छता को इस रुप में अपना ले तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश भी यूरोप और अमेरिका के देशों की तरह साफ सुथरा हो जाएगा ।
मौके पर बोलते हुए अतिरिक्त सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय डॉक्टर वत्स ने कहा की जहां स्वच्छता है वहां देवता निवास करते हैं, यह एक पुरानी कहावत है किंतु उत्तराखंड देवभूमि है अतः यहां के लोगों का यह फर्ज बनता है कि वह स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें । इस बात को एम्स ऋषिकेश ने साकार करके बताया है। इसलिये भारत सरकार के कायाकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत स्वच्छ अस्पताल के लिए एम्स ऋषिकेश को 50 लाख रुपए का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है जिसके लिए निदेशक प्रोफेसर रवि कांत के नेतृत्व में काम करने वाली पूरी टीम बधाई की पात्र है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो मुकेश त्रिपाठी ने उपस्थित जनों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ सतीश रवि ने किया। कार्यक्रम में प्रो सुरेखा किशोर, प्रो बीना रवि, प्रो सुधीर सक्सेना, प्रो सौरभ वार्ष्णेय, प्रो सुरेश शर्मा सहित तमाम फैकल्टी अधिकारी एवम कर्मचारी उपस्थित थे।
अस्पताल के विभिन्न ओपीडी एवं आईपीडी वार्डों में से सबसे स्वच्छ आईपीडी एवं ओपीडी का चयन किया गया जिसमे गायनाकोलॉजी और रेडियोथेरेपी विभाग ने बाजी मारी। इस अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले सफाई कर्मियों को भी पुरस्कृत किया गया ।
समापन समारोह में बोलते हुए एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने कहा की स्वच्छता सिर्फ एक पखवाड़े तक सीमित न रहकर सतत चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए। इससे न सिर्फ इन्फेक्शन कंट्रोल होता है बल्कि दवाइयां और इलाज पर होने वाले खर्च में भी कटौती होती है । स्वच्छता की आदत हमें बच्चों में बचपन से डालनी चाहिए ताकि वह बड़े होकर इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना सकें । स्वच्छता का तात्पर्य न सिर्फ अपने घर को साफ रखना है बल्कि अपने घर के आसपास के एक-एक घर को भी साफ रखना भी है। अगर हर कोई स्वच्छता को इस रुप में अपना ले तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश भी यूरोप और अमेरिका के देशों की तरह साफ सुथरा हो जाएगा ।
मौके पर बोलते हुए अतिरिक्त सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय डॉक्टर वत्स ने कहा की जहां स्वच्छता है वहां देवता निवास करते हैं, यह एक पुरानी कहावत है किंतु उत्तराखंड देवभूमि है अतः यहां के लोगों का यह फर्ज बनता है कि वह स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें । इस बात को एम्स ऋषिकेश ने साकार करके बताया है। इसलिये भारत सरकार के कायाकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत स्वच्छ अस्पताल के लिए एम्स ऋषिकेश को 50 लाख रुपए का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है जिसके लिए निदेशक प्रोफेसर रवि कांत के नेतृत्व में काम करने वाली पूरी टीम बधाई की पात्र है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो मुकेश त्रिपाठी ने उपस्थित जनों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ सतीश रवि ने किया। कार्यक्रम में प्रो सुरेखा किशोर, प्रो बीना रवि, प्रो सुधीर सक्सेना, प्रो सौरभ वार्ष्णेय, प्रो सुरेश शर्मा सहित तमाम फैकल्टी अधिकारी एवम कर्मचारी उपस्थित थे।


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