भिलंगना ब्लॉक के विनकखाल का मामला
नई टिहरी। नाबालिग का बलात्कार कर उसकी निर्मम हत्या करने वाले अभियुक्त को जिला एवं सत्र न्यायाधीन कुमकुम रानी की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। वर्ष 1993 के बाद टिहरी सेशन कोर्ट में फांसी की सजा दिए जाने का यह दूसरा मामला है। कोर्ट ने मृतक पीडि़ता के परिवार को 50 हजार रूपए आर्थिक मुआवजा दिए जाने का भी आदेश दिया है।
बताते चलें कि युसुफ ऊर्फ सोनू निवासी नुरूपुर तहसील चांदपुर जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश ने मुस्लिम रीति रिवाज से अनीता के साथ संबध बनाकर कर रहा रह था। अनीता के पहले पति भीम सिंह ने उसे दो साल पहले ही छोड़ दिया था। 11 मार्च 2016 को भिलंगना ब्लॉक के चमियाला राजस्व निरीक्षक को मृतका की मां अनीता ने सूचना दी कि अभियुक्त यूसुफ उर्फ सोनू ने पांच मार्च की रात्रि को मृतका को अपने साथ सुलाकार उसके साथ बलात्कार कर हत्या कर दी। सुबह उठकर जब अनीता देवी अपनी पुत्री को उठाने गई तो वह मरी हुई मिली। इस दौरान मृतका के पकड़े भी बदन पर उल्टे दिखे मिले। बताया कि मृतका की दोनों टांगों पर खून लगा हुआ था और नीले रंग की दिख रही थी। इस बीच अनीता ने अपने पिता को बुलाया। लेकिन आसपास के लोगों ने इसे स्वाभाविक मौत मानते हुए मृतका को दफना दिया। बावजूद अनीता देवी को विश्वास था कि उसकी पुत्री की मौत यूसुफ के बालात्कार करने के बाद हुई। बताया कि युसुफ पहले भी उसकी पुत्री के साथ ऐसी हरकतें करता आया था। विनकखाल के राजस्व उप निरीक्षक उस दौरान ट्रेनिंग पर होने के कारण यह मुकदमा राजस्व उप निरीक्षक चमियाला के यहां दर्ज किया। स्थानीय लोगों के दबाव के बाद मृतका के शव को गड्ढ़े से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया। इस बीच अभियुक्त यूसुफ को राजस्व पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
विवेचना अधिकारी ने आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। जहां अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक चंद्रवीर सिंह नेगी ने मामले में 13 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने इसे जघन्यतम अपराध मानते हुए सख्त टिप्पणी की कि मृतका अबोध थी और समाज की विकृत्तियों से बिल्कुल अनभिज्ञ थी। उसे इस तरह के बलात्कार के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। उसकी उम्र खेलने-कूदने की थी। इसलिए अभियुक्त को कठोर सजा दी जानी न्यायोचित्त है, क्योंकि इससे समाज में एक संदेश जाएगा और भविष्य में कोई ऐसा अमानवीय कृत्य नहीं करेगा। कोर्ट ने अभियुक्त को फांसी की सजा सुना दी। फांसी की सजा सुनाने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपनी कलम तोड़ दी।
नई टिहरी। नाबालिग का बलात्कार कर उसकी निर्मम हत्या करने वाले अभियुक्त को जिला एवं सत्र न्यायाधीन कुमकुम रानी की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। वर्ष 1993 के बाद टिहरी सेशन कोर्ट में फांसी की सजा दिए जाने का यह दूसरा मामला है। कोर्ट ने मृतक पीडि़ता के परिवार को 50 हजार रूपए आर्थिक मुआवजा दिए जाने का भी आदेश दिया है।
बताते चलें कि युसुफ ऊर्फ सोनू निवासी नुरूपुर तहसील चांदपुर जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश ने मुस्लिम रीति रिवाज से अनीता के साथ संबध बनाकर कर रहा रह था। अनीता के पहले पति भीम सिंह ने उसे दो साल पहले ही छोड़ दिया था। 11 मार्च 2016 को भिलंगना ब्लॉक के चमियाला राजस्व निरीक्षक को मृतका की मां अनीता ने सूचना दी कि अभियुक्त यूसुफ उर्फ सोनू ने पांच मार्च की रात्रि को मृतका को अपने साथ सुलाकार उसके साथ बलात्कार कर हत्या कर दी। सुबह उठकर जब अनीता देवी अपनी पुत्री को उठाने गई तो वह मरी हुई मिली। इस दौरान मृतका के पकड़े भी बदन पर उल्टे दिखे मिले। बताया कि मृतका की दोनों टांगों पर खून लगा हुआ था और नीले रंग की दिख रही थी। इस बीच अनीता ने अपने पिता को बुलाया। लेकिन आसपास के लोगों ने इसे स्वाभाविक मौत मानते हुए मृतका को दफना दिया। बावजूद अनीता देवी को विश्वास था कि उसकी पुत्री की मौत यूसुफ के बालात्कार करने के बाद हुई। बताया कि युसुफ पहले भी उसकी पुत्री के साथ ऐसी हरकतें करता आया था। विनकखाल के राजस्व उप निरीक्षक उस दौरान ट्रेनिंग पर होने के कारण यह मुकदमा राजस्व उप निरीक्षक चमियाला के यहां दर्ज किया। स्थानीय लोगों के दबाव के बाद मृतका के शव को गड्ढ़े से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया। इस बीच अभियुक्त यूसुफ को राजस्व पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
विवेचना अधिकारी ने आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। जहां अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक चंद्रवीर सिंह नेगी ने मामले में 13 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने इसे जघन्यतम अपराध मानते हुए सख्त टिप्पणी की कि मृतका अबोध थी और समाज की विकृत्तियों से बिल्कुल अनभिज्ञ थी। उसे इस तरह के बलात्कार के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। उसकी उम्र खेलने-कूदने की थी। इसलिए अभियुक्त को कठोर सजा दी जानी न्यायोचित्त है, क्योंकि इससे समाज में एक संदेश जाएगा और भविष्य में कोई ऐसा अमानवीय कृत्य नहीं करेगा। कोर्ट ने अभियुक्त को फांसी की सजा सुना दी। फांसी की सजा सुनाने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपनी कलम तोड़ दी।

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