पौड़ी: सीमांत उत्तरकाशी जिले की पंचगाईं पट्टी की अपेक्षाकृत कम साक्षर महिलाओं ने अपने पति एवं जवान बेटों में बढ़ती नशाखोरी के खिलाफ जिस तरह की सख्ती पेश की है, वह अन्य समाजों के लिए अनुकरणीय ही नहीं नारी सशक्तीकरण की मिसाल भी है। इसी सख्ती का नतीजा है कि आज जिले के मोरी ब्लाक की रुपिन व सुपिन घाटी से लगी पंचगाईं पट्टी के 22 गांवों में लोग नशे से तौबा कर चुके हैं।
शराब, चरस व अफीम के नशे से बरबाद हो रही नई पीढ़ी के युवाओं और जवां मर्दों को सुधारने के लिए अनपढ़ और अपेक्षाकृत कम पढ़ी-लिखी महिलाओं ने इसी साल अप्रैल में यह अनूठी मुहिम शुरू की। हालांकि, इस मुहिम का बहुत प्रचार नहीं मिला, लेकिन मोरी ब्लाक की रुपिन और सुपिन घाटी से लगी पंचगाईं पट्टी में इसका जबरदस्त असर हुआ। नतीजा, आज पंचगाईं पट्टी के 22 गांव शत-प्रतिशत नशामुक्त होकर समाज को एक नई दिशा दे रहे हैं। सोमेश्वर देवता के उपासक इस क्षेत्र में अब कोई भी पुरुष घर पर शराब व अन्य मादक पदार्थों का सेवन न तो स्वयं करता है और न दूसरों के लिए ही जाम सजाए जाते हैं। यहां तक कि चौक-चौबारों में ताश खेलने वाले लोगों पर भी जुर्माना वसूलने की परंपरा विकसित होने से अब यह कुरीति भी समाप्त होने लगी है।
ऐसे हुई अभियान की शुरुआत
पंचगाईं की तारा देवी, मीमरी देवी, अतरी देवी व लच्छी देवी बताती हैं कि नशाखोरी से बरबाद होती भावी पीढ़ी को सुधारने के लिए इस अभियान की शुरुआत हमने अप्रैल 2017 में बिस्सू मेले के दौरान फिताड़ी से की। हमने सोमेश्वर देवता की डांगरी (प्रतीक) के गांव पहुंचने पर उसे छूकर नशाखोरी बंद कराने का संकल्प लिया। इस संकल्प का ही असर है कि हम घर में शराब समेत अन्य मादक पदार्थों का सेवन करने वाले पति एवं बेटों की शिकायत खुद ही पंचायत में करती हैं।
पत्नी की शिकायत पर दंडित हुए प्रधान
अभियान से जुड़ी अनीता देवी, विमला देवी, सुनीता देवी, सरिता देवी आदि बताती हैं कि अभियान के तहत व्यक्ति के खुद शराब पीने पर 500 रुपये, अन्य लोगों को पिलाने पर 5000 रुपये और ताश खेलने व धूमपान करने पर 500 रुपये जुर्माना वसूला जाता है। क्षेत्र की ग्रामसभा रेक्का के प्रधान प्रह्लाद ङ्क्षसह बताते हैं कि उन्हें भी शराब पिलाने पर पत्नी की शिकायत के बाद महिला पंचायत में 5000 रुपये का जुर्माना भुगतना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कसम खा ली कि अगली बार से ऐसी गलती भूल से भी नहीं करेंगे।
जुर्माने की राशि से पुण्य के कार्य
महिलाएं जुर्माने के रूप में वसूली गई राशि को गरीब बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह और इलाज पर खर्च कर सामूहिक सहभागिता का नया अध्याय लिख रहीं हैं। अभियान से जुड़ी कल्गा देवी व मीमरी देवी बताती हैं कि शादी-ब्याह जैसे आयोजनों पर भी हमारी विशेष नजर रहती है।


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