ऋषिकेश। श्री बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान के देहरादून रोड स्तिथ प्रबन्ध कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ के तहत आज ’’भारत की आदर्श अर्थनीति’’ विषय पर परिचर्चा में मुख्य वक्ता मौलिक विचारक बजरंग मुनि ने कहा कि आर्थिक समस्याओं का सिर्फ आर्थिक समाधान होना चाहिये। किसी भी परिस्थिति में प्रशासनिक समाधान उचित नहीं है।भारत जैसे देश में आर्थिक दृष्टि से मजबूत लोगों पर कर लगाकर कमजोर लोगों को कर मुक्त करना चाहिये। वर्तमान समय में इसका उल्टा हो रहा है।आर्थिक विषमता बहुत बडी समस्या होती है। आर्थिक विषमता को कम किया जाना चाहिये।हजारों वर्षों से बुद्धिजीवियों ने श्रम शोषण के अनेक तरीके खोजे और उनका लाभ उठाया। वर्तमान भारत में भी बुद्धिजीवियों द्वारा श्रम शोषण के नये-नये तरीके खोजे जा रहे है।राज्य को सिर्फ सुरक्षा और न्याय तक सीमित रहना चाहिये राज्य को कभी समाज सुधार अथवा व्यापार नहीं करना चाहिये।भारत की संवैधानिक व्यवस्था में विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका के समान ही एक स्वतंत्र अर्थपालिका भी होनी चाहिये जिस पर संविधान के अतिरिक्त किसी अन्य का नियंत्रण न हो।कोई भी बुद्धिजीवी श्रम के साथ न्याय के प्रयत्न नहीं करता। हर बुद्धिजीवी कृत्रिम उर्जा मूल्य वृद्धि का विरोध करता है क्योंकि कृत्रिम उर्जा मूल्य वृद्धि श्रम की मांग और श्रम का मूल्य बढाने में सहायक है।सभी प्रकार के कर हटाकर एक सुरक्षा कर होना चाहिये जो सम्पत्ति कर के रूप में हो सकता है। किसी प्रकार की सुविधा के लिये सरकार को फीस लेने की व्यवस्था करनी चाहिये, टैक्स नहीं।राज्य की भूमिका सुरक्षा का वातावरण बनाने तक सीमित होती है। सुरक्षित रहना व्यक्ति का व्यक्तिगत कार्य है।सुरक्षा में बाधा की स्थिति में राज्य को मुआवजा देना चाहिये। अन्य किसी प्रकार का मुआवजा बंद कर दिया जाये। सुरक्षा का अर्थ सुरक्षित रखना नहीं है बल्कि सुरक्षा की बाधाओं को दूर करना है। राज्य को कभी सुरक्षा नहीं देनी चाहिये बल्कि बाधाओं को दूर करना चाहिये।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुवे आचार्य पंकज ने कहा कि भारत में अर्थव्यवस्था पूरी तरह विपरीत दिशा में जा रही है। समाजवाद, साम्यवाद, पूंजीवाद जैसे दुनियां के अनेक वादों के चक्कर में भारत की अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी है। समाजवादी और साम्यवादी अर्थव्यवस्था में सरकारीकरण को मजबूत किया तो पूंजीवाद ने सरकारीकरण को तो कमजोर किया किन्तु आर्थिक असमानता को मजबूत किया। आदर्श स्थिति में अर्थव्यवस्था न तो पूरी तरह सरकार के अधीन होनी चाहिए न ही पूरी तरह बाजार के अधीन। इस अवसर पर ओम प्रकाश अभ्युदय द्विवेदी,अनुसूया प्रसाद बंग्वाल,आचार्य रामकृष्ण पोखरियाल,कुसुम जोशी,संदीप सिंह,अंकित नेथानि,प्रमोद केसरी , प्रेमदत्त डिमरी, विमला नौटियाल,अनुसूया प्रसाद,शैलेन्द्र रावत,जयपाल यादव उपस्थित थे।


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