25 से 29 मार्च 2019-परमार्थ योग हाॅल, समय 9:00 से 4:30 बजे
लन्दन और ऋषिकेश के विख्यात चिकित्सकों द्वारा की जायेंगी चिकित्सा
परमार्थ निकेतन में चिकित्सकों के दल ने प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प
दांत के दर्द के साथ दिल के दर्द को भी समझें-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
प्रकृतिमय जीवन पद्धति ही श्रेष्ठ जीवन पद्धति
सर्वप्रथम एक चिकित्सक का एक सहृदय इंसान होना जरूरी
स्वच्छ पर्यावरण द्वारा होगा स्वस्थ शरीर का निर्माण
ऋषिकेश, 25 मार्च। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, एम्स के निदेशक डाॅ रविकान्त जी, डाॅ उपेन पटेल, डेन्टल सर्जन, पीएचडी लन्दन, डाॅ प्रीता लोढिया, डेन्टल सर्जन लंदन, डाॅ माया दाभी, डेन्टल सर्जन, लन्दन, डेन्टल सर्जन डाॅ केतन पटेल, लन्दन, डाॅ मनोज काण्डपाल, डेन्टल सर्जन, ऋषिकेश, डाॅ दीप्ती जोगिया, मेडिकल डाॅक्टर, लन्दन, श्री विनोद लोढिया, डाॅ रवि कौशल, मेडिकल डाॅक्टर, परमार्थ निकेतन ने दीप प्रज्जवलित कर स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन किया।
परमार्थ निकेतन में पांच दिनों तक चलने वाले चिकित्सा शिविर में दांतों की निःशुल्क जाँच, दांतों एवं मसूड़ों की सफाई, दांत निकालना, दांत भरवाना, दांता की झनझनाहट का इलाज साथ ही निशुल्क दन्त परीक्षण, डायबिटीज, दमा, अस्थमा रोग की भी जांच की जायेगी तथा निशुल्क दवाईयों का वितरण किया जायेगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने चिकित्सकों से चर्चा के दौरान उत्तराखण्ड राज्य की चिकित्सा स्थितियों के विषय में विस्तृत जानकारी दी। स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति का लाभ ग्रामीणों एवं उत्तराखण्ड राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों तक भी पहुंचना चाहिये।
स्वामी चिदानन्द जी महाराज ने कहा कि ’मानव सेवा के साथ-साथ प्रकृति की सेवा करना सभी का परम कर्तव्य है। वर्तमान समय में मनुष्य ने अपनी जीवन पद्धति को प्रकृति से दूर कर लिया है जिसके कारण व्याधियां बढ़ते जा रही है। हमें व्याधियों को कम करना है तो प्रकृति के अनुरूप जीवन यापन करना होगा। उन्होने कहा कि प्रकृतिमय जीवन पद्धति ही श्रेष्ठ जीवन पद्धति है।’
स्वामी जी महाराज ने कहा कि लन्दन और ऋषिकेश के चिकित्सकों की पूरी टीम पूर्ण भक्तिभाव से भरी टीम है, मानवता की सेवा ही उनके लिये सच्ची पूजा है। इन्होने मावनता एवं भक्ति के सार को समझा। स्वामी जी ने सभी चिकित्सकों को पुष्प हार पहनाकर आशीर्वाद दिया।
स्वामी जी महाराज ने डाक्टरों से आहवान किया कि रोगियों के दांत के दर्द के साथ-साथ लोगों के दिलों में जो दर्द है, पीड़ा है उसके लिये भी सहानुभूति रखें, यही सच्ची सेवा हैैै।
एम्स के निदेशक डाॅ रविकान्त जी ने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के नेतृत्व में परमार्थ निकेतन विश्व स्तर पर पर्यावरण, जल, शिक्षा, चिकित्सा जैसे अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। यहां से सेवा, साधना और समर्पण का संदेश निरंतर प्रवाहित होता रहता है।
चिकित्सा शिविर में अभी तक 150 से अधिक रोगियों की चिकित्सा की गयी। चिकित्सकों का दल ऋषिकेश के आस-पास के क्षेत्रों में जाकर चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध करा रहे है।
इस अवसर पर स्वामी जी ने डाॅक्टरों के दल को ‘‘सेवा ही धर्म‘’ संकल्प कराया। उन्होेने कहा कि सेवा एवं भक्ति का अनुपम और उत्कृष्ट उदाहरण श्री हनुमान जी है। हनुमान जी सेवा कार्य का सबसे बड़ा उदाहरण है। ’राम काज किन्हे बिना मोहि कहाँ विश्राम’। जब तक सेवा का कार्य न हो जाये सब की सेवा न हो जाये तब तक विश्राम कहां। यहीं श्रीराम की सेवा है, मानव सेवा ही माधव सेवा है। काम के लिये सेवा तो सभी करते है परन्तु लन्दन से आये चिकित्सकों का दल सेवा के लिये कार्य कर रहे है। ये चिकित्सक अस्थमा का ईलाज आस्था के साथ कर रहे है। चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ संगीतमय श्री हनुमान चालिसा का पाठ कर किया गया।
स्वामी जी ने एम्स के निदेशक डाॅ रविकान्त जी का अभिनन्दन करते हुये कहा कि इस पूरे क्षेत्र के लिये एम्स किसी वरदान से कम नहीं है। भारत सरकार ने एम्स खोलकर अद्भुत कार्य किया है। कई बार योजनायें तो होती है परन्तु योजनाकार, आयोजक, निदेशक, कर्ता सही नहीं रहे तो योजनायें ठीक से क्रियान्वित नहीं पाती। डाॅ रविकान्त एक ऐसे निदेशक है जिन्होने एम्स को एक नये मुकाम तक पहुंचाया है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में डाॅक्टरों के दल ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। इस अवसर पर लन्दन से आयी एलिसा चैहान, मोनिका, हेरियट विल्सन, समीरा, एमिलि, मेहर ग्रेवाल, ल्यूक, लुईस, योगेश पटेल, शोभना, शिल्पा, चन्द्रिका, चिराग, रूपा, परमेश और अन्य ने चिकित्सा शिविर में सहभाग किया।
लन्दन और ऋषिकेश के विख्यात चिकित्सकों द्वारा की जायेंगी चिकित्सा
परमार्थ निकेतन में चिकित्सकों के दल ने प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प
दांत के दर्द के साथ दिल के दर्द को भी समझें-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
प्रकृतिमय जीवन पद्धति ही श्रेष्ठ जीवन पद्धति
सर्वप्रथम एक चिकित्सक का एक सहृदय इंसान होना जरूरी
स्वच्छ पर्यावरण द्वारा होगा स्वस्थ शरीर का निर्माण
ऋषिकेश, 25 मार्च। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, एम्स के निदेशक डाॅ रविकान्त जी, डाॅ उपेन पटेल, डेन्टल सर्जन, पीएचडी लन्दन, डाॅ प्रीता लोढिया, डेन्टल सर्जन लंदन, डाॅ माया दाभी, डेन्टल सर्जन, लन्दन, डेन्टल सर्जन डाॅ केतन पटेल, लन्दन, डाॅ मनोज काण्डपाल, डेन्टल सर्जन, ऋषिकेश, डाॅ दीप्ती जोगिया, मेडिकल डाॅक्टर, लन्दन, श्री विनोद लोढिया, डाॅ रवि कौशल, मेडिकल डाॅक्टर, परमार्थ निकेतन ने दीप प्रज्जवलित कर स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन किया।
परमार्थ निकेतन में पांच दिनों तक चलने वाले चिकित्सा शिविर में दांतों की निःशुल्क जाँच, दांतों एवं मसूड़ों की सफाई, दांत निकालना, दांत भरवाना, दांता की झनझनाहट का इलाज साथ ही निशुल्क दन्त परीक्षण, डायबिटीज, दमा, अस्थमा रोग की भी जांच की जायेगी तथा निशुल्क दवाईयों का वितरण किया जायेगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने चिकित्सकों से चर्चा के दौरान उत्तराखण्ड राज्य की चिकित्सा स्थितियों के विषय में विस्तृत जानकारी दी। स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति का लाभ ग्रामीणों एवं उत्तराखण्ड राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों तक भी पहुंचना चाहिये।
स्वामी चिदानन्द जी महाराज ने कहा कि ’मानव सेवा के साथ-साथ प्रकृति की सेवा करना सभी का परम कर्तव्य है। वर्तमान समय में मनुष्य ने अपनी जीवन पद्धति को प्रकृति से दूर कर लिया है जिसके कारण व्याधियां बढ़ते जा रही है। हमें व्याधियों को कम करना है तो प्रकृति के अनुरूप जीवन यापन करना होगा। उन्होने कहा कि प्रकृतिमय जीवन पद्धति ही श्रेष्ठ जीवन पद्धति है।’
स्वामी जी महाराज ने कहा कि लन्दन और ऋषिकेश के चिकित्सकों की पूरी टीम पूर्ण भक्तिभाव से भरी टीम है, मानवता की सेवा ही उनके लिये सच्ची पूजा है। इन्होने मावनता एवं भक्ति के सार को समझा। स्वामी जी ने सभी चिकित्सकों को पुष्प हार पहनाकर आशीर्वाद दिया।
स्वामी जी महाराज ने डाक्टरों से आहवान किया कि रोगियों के दांत के दर्द के साथ-साथ लोगों के दिलों में जो दर्द है, पीड़ा है उसके लिये भी सहानुभूति रखें, यही सच्ची सेवा हैैै।
एम्स के निदेशक डाॅ रविकान्त जी ने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के नेतृत्व में परमार्थ निकेतन विश्व स्तर पर पर्यावरण, जल, शिक्षा, चिकित्सा जैसे अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। यहां से सेवा, साधना और समर्पण का संदेश निरंतर प्रवाहित होता रहता है।
चिकित्सा शिविर में अभी तक 150 से अधिक रोगियों की चिकित्सा की गयी। चिकित्सकों का दल ऋषिकेश के आस-पास के क्षेत्रों में जाकर चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध करा रहे है।
इस अवसर पर स्वामी जी ने डाॅक्टरों के दल को ‘‘सेवा ही धर्म‘’ संकल्प कराया। उन्होेने कहा कि सेवा एवं भक्ति का अनुपम और उत्कृष्ट उदाहरण श्री हनुमान जी है। हनुमान जी सेवा कार्य का सबसे बड़ा उदाहरण है। ’राम काज किन्हे बिना मोहि कहाँ विश्राम’। जब तक सेवा का कार्य न हो जाये सब की सेवा न हो जाये तब तक विश्राम कहां। यहीं श्रीराम की सेवा है, मानव सेवा ही माधव सेवा है। काम के लिये सेवा तो सभी करते है परन्तु लन्दन से आये चिकित्सकों का दल सेवा के लिये कार्य कर रहे है। ये चिकित्सक अस्थमा का ईलाज आस्था के साथ कर रहे है। चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ संगीतमय श्री हनुमान चालिसा का पाठ कर किया गया।
स्वामी जी ने एम्स के निदेशक डाॅ रविकान्त जी का अभिनन्दन करते हुये कहा कि इस पूरे क्षेत्र के लिये एम्स किसी वरदान से कम नहीं है। भारत सरकार ने एम्स खोलकर अद्भुत कार्य किया है। कई बार योजनायें तो होती है परन्तु योजनाकार, आयोजक, निदेशक, कर्ता सही नहीं रहे तो योजनायें ठीक से क्रियान्वित नहीं पाती। डाॅ रविकान्त एक ऐसे निदेशक है जिन्होने एम्स को एक नये मुकाम तक पहुंचाया है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में डाॅक्टरों के दल ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। इस अवसर पर लन्दन से आयी एलिसा चैहान, मोनिका, हेरियट विल्सन, समीरा, एमिलि, मेहर ग्रेवाल, ल्यूक, लुईस, योगेश पटेल, शोभना, शिल्पा, चन्द्रिका, चिराग, रूपा, परमेश और अन्य ने चिकित्सा शिविर में सहभाग किया।


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