ऋषिकेश। मायाकुंड स्थित निशुल्क शिक्षण स्थान उड़ान में स्कूली बच्चों को होली पर्व पर होलिका दहन से जुड़ी हिरण्यकश्यप एवं प्रहलाद की पौराणिक कथा के बारे में बताया गया। साथ ही बच्चों को होली के रंगो से होने वाले नुकसान एवं बचाव की जानकारी के साथ प्राकृतिक रंगो से होली खेलने की बात बताई गई। स्कूल के निदेशक डॉ राजे नेगी ने बताया कि आमतौर से बाजार में उपलब्ध  रंग रासायनिक पदार्थों कांच, क्रोमियम आयोडाइड, लेड ऑक्साइड, कापर सल्फेट, एल्युमिनियम ब्रोमाइड युक्त पदार्थो से बने होते है जिनका असर सीधे तौर से हमारी त्वचा, आंखो,हमारी स्वांस (अस्थमा),किडनी (गुर्दा) पर पड़ता है। इसलिए होली में  प्राकृतिक (हर्बल) रंगों का प्रयोग करें। बच्चों को पिचकारी एवं गुब्बारे का प्रयोग कम से कम करने की बात बताते हुवे राह चलते व्यक्तियों एवं गाड़ियों पर गुब्बारा ना फेंकने की बात कही क्योंकि यह दुर्घटना एवं आपसी झगड़े का कारण बन सकता है। पानी का प्रयोग कम से कम करने की सलाह देते हुवे जल संचय तो जीवन संचय की बात कही। डॉ नेगी ने कहा कि होली खेलने से पहले अपनी त्वचा एवं बालों में नारियल, सरसों का तेल या कोल्ड क्रीम लगा लें,इससे होली का रंग आपकी त्वचा पर अपना असर नहीं छोड़ेगा।सिर पर टोपी या हेट लगाएं,जिससे बाल रंगो के दुष्प्रभाव से बच सकें।कोई रंग लगाने आए तो अपनी आंखे बंद रखे या फिर आंखो में चस्मा पहनें,जिससे खतरनाक रंगो के रसायन से आपकी आंखे बच सकें।डॉ नेगी ने पर्यावरण संरक्षण की अपील करते हुवे घरों में प्राकृतिक रंग बनाने की जानकारी देते हुवे कहा कि टेसू व गेंदे के फूल सुखाकर और फिर उनको उबालकर पीला रंग,चुकंदर से लाल रंग,पालक वी करी पत्ते से हरा रंग,हल्दी  चन्दन से पीला रंग बनाकर होली खेली जा सकती है।इस अवसर पर विनोद जुगलान, उत्तम सिंह असवाल,रमेश लिंग वाल,मयंक भट्ट प्रियंका कुकरेती, प्रिया क्षेत्री,शीतल नेगी,मीनाक्षी राना उपस्थित थे।

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