नमन, वदंन एवं श्रद्धांजलि
अध्यात्म जगत का जीता जागता सूरज आज परमतत्व में विलीन हो गया-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 25 जून। भारत माता मन्दिर के संस्थापक और जीवनपर्यंत भारत माता की सेवा करने, सनातन संस्कृति और वैदिक संस्कृति को जीने वाले पद्म भूषण से सम्मानित, निवर्तमान शंकराचार्य पूज्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज को व्यथित मन से परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज ने करोड़ो-करोड़ो लोगों के दिलों में ज्ञान के दीपक जलाये है, आज वे स्वयं एक महादीप बन गये। उन्होने कहा कि आज अध्यात्म जगत के एक अध्याय का अंत हुआ। इस महान विभूति को प्रणाम और नमन करते हुये कहा कि स्वामी जी महाराज के विचारों की रोशनी सदा ही हम सभी को आलोकित करती रहेगी क्योकि संत कभी मरा नहीं करते वे तो अमर है।
 स्वामी जी ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज ने जीवनपर्यंत भारत माता की आराधना की ऐसे पद्म भूषण से सम्मानित, निवर्तमान शंकराचार्य जन-जन के प्रिय पूज्य महापुरूष स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज के चरण में शत्-शत् नमन, वंदन एवं श्रद्धाजंलि। उनका जाना अध्यात्म जगत और भारत के लिये अपूरणीय क्षति है। 
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार और आचार्यो ने पूज्य महाराज श्री को नमन करते हुये श्रद्धांजलि अर्पित की। आज की परमार्थ गंगा आरती पूज्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज को समर्पित की और माँ गंगा को दीप समर्पित कर प्रार्थना की।

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