सौर एवं चंद्र दोनों पद्धतियों से श्रावण मास के चौथे एवं अंतिम सोमवार का व्रत आज रखा जाएगा कई वर्षों के बाद ऐसा शुभ अवसर आया है जब श्रावण मास में क्रमशः दूसरे एवं चौथे सोमवार को प्रदोष अर्थात पूजा काल में त्रयोदशी तिथि पड़ रही है जो जन सामान्य के साथ-साथ पूरे देश के लिए बहुत शुभ फलदाई योग है
राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज आईपीएल में संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि आज दोपहर 12:10 तक द्वादशी तथा उसके उपरांत त्रयोदशी तिथि होने से सोम प्रदोष व्रत हो गया है जोर श्रद्धालुओं सहित पूरे देश पर भगवान शिव की कृपा का संकेतसावन मास के आखिरी सोमवार का व्रत आज वर्षों बाद सावन में दूसरा सोम प्रदोष व्रत
सौर एवं चंद्र दोनों पद्धतियों से श्रावण मास के चौथे एवं अंतिम सोमवार का व्रत आज रखा जाएगा कई वर्षों के बाद ऐसा शुभ अवसर आया है जब श्रावण मास में क्रमशः दूसरे एवं चौथे सोमवार को प्रदोष अर्थात पूजा काल में त्रयोदशी तिथि पड़ रही है जो जन सामान्य के साथ-साथ पूरे देश के लिए बहुत शुभ फलदाई योग है
राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज आईडीपीएल में संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि आज दोपहर 12:10 तक द्वादशी तथा उसके उपरांत त्रयोदशी तिथि होने से सोम प्रदोष व्रत हो गया है जोर श्रद्धालुओं सहित पूरे देश पर भगवान शिव की कृपा का संकेत कर रहा है इस दिन स्वयं एवं परिवार के कल्याण के लिए व्रत करने से जहां परिवार का कल्याण होगा वहीं राष्ट्रीय कल्याण के लिए व्रत रखने एवं शिव अर्चन करने से पूरे देश के लिए शुभ रहेगा
मुख्यमंत्री द्वारा ज्योतिष वैज्ञानिक सम्मान से सम्मानित आचार्य डॉक्टर घिल्डियाल आगे बताते हैं कि इस दिन मन का स्वामी चंद्रमा देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु में संचार करेगा इससे साधकों को व्रत एवं पूजन से जहां एक तरफ आध्यात्मिक ऊंचाई मिलेगी तो दूसरी तरफ लक्ष्मी सदैव सुमुखी प्र ददाति शंभू शिव पुराण के उक्त कथन से सभी भक्तों को धन-धान्य की प्राप्ति होगी इस वर्ष सावन में दो सोमवार को क्रमशः दूसरे एवं चौथे को प्रदोष पढ़ने से बहुत अद्भुत संयोग बना है डॉक्टर घिल्डियाल ने बताया कि 11 अगस्त को विगत 2 माह से वक्री चल रहे देव गुरु बृहस्पति के मार्गी होने से सौरमंडल में चल रही हलचल का पृथ्वी लोक पर राशि अनुसार प्रभाव पड़ेगा यह प्रभाव सकारात्मक रहे इस हेतु श्रद्धालु अपनी अपनी राशि के अनुसार पूजन सामग्री से पूजा करें तो सभी शुभ फलों की प्राप्ति होगी
राशि अनुसार पूजन सामग्री
मेष मिश्रित तिल एवं बेलपत्र वृष शंख का जल एवं दूध मिथुन जो एवं बेलपत्र कर्क दूध दही घी सिंह शहद एवं जल कन्या जो एवं बिल्व पत्र तुला सफेद तिल एवं जल वृश्चिक मिश्रित गुण एवं जल धनु जो तिल बिल्वपत्र मकर काले तिल एवं दूध मिला भजन कुंभ काले तिल बिल्वपत्र मीन जो काले तिल एवं बिल्व पत्रों से पूजन करें कर रहा है इस दिन स्वयं एवं परिवार के कल्याण के लिए व्रत करने से जहां परिवार का कल्याण होगा वहीं राष्ट्रीय कल्याण के लिए व्रत रखने एवं शिव अर्चन करने से पूरे देश के लिए शुभ रहेगा
मुख्यमंत्री द्वारा ज्योतिष वैज्ञानिक सम्मान से सम्मानित आचार्य डॉक्टर घिल्डियाल आगे बताते हैं कि इस दिन मन का स्वामी चंद्रमा देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु में संचार करेगा इससे साधकों को व्रत एवं पूजन से जहां एक तरफ आध्यात्मिक ऊंचाई मिलेगी तो दूसरी तरफ लक्ष्मी सदैव सुमुखी प्र ददाति शंभू शिव पुराण के उक्त कथन से सभी भक्तों को धन-धान्य की प्राप्ति होगी इस वर्ष सावन में दो सोमवार को क्रमशः दूसरे एवं चौथे को प्रदोष पढ़ने से बहुत अद्भुत संयोग बना है डॉक्टर घिल्डियाल ने बताया कि 11 अगस्त को विगत 2 माह से वक्री चल रहे देव गुरु बृहस्पति के मार्गी होने से सौरमंडल में चल रही हलचल का पृथ्वी लोक पर राशि अनुसार प्रभाव पड़ेगा यह प्रभाव सकारात्मक रहे इस हेतु श्रद्धालु अपनी अपनी राशि के अनुसार पूजन सामग्री से पूजा करें तो सभी शुभ फलों की प्राप्ति होगी
राशि अनुसार पूजन सामग्री
मेष मिश्रि तिल एवं बेलपत्र वृष शंख का जल एवं दूध मिथुन जौ एवं बेलपत्र कर्क दूध दही घी सिंह शहद एवं जल कन्या जौ एवं बिल्व पत्र तुला सफेद तिल एवं जल वृश्चिक मिश्रित गुड एवं जल धनु जौ तिल बिल्वपत्र मकर काले तिल एवं दूध कुंभ काले तिल बिल्वपत्र मीन जौ काले तिल एवं बिल्व पत्रों से पूजन करें।
राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज आईपीएल में संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि आज दोपहर 12:10 तक द्वादशी तथा उसके उपरांत त्रयोदशी तिथि होने से सोम प्रदोष व्रत हो गया है जोर श्रद्धालुओं सहित पूरे देश पर भगवान शिव की कृपा का संकेतसावन मास के आखिरी सोमवार का व्रत आज वर्षों बाद सावन में दूसरा सोम प्रदोष व्रत
सौर एवं चंद्र दोनों पद्धतियों से श्रावण मास के चौथे एवं अंतिम सोमवार का व्रत आज रखा जाएगा कई वर्षों के बाद ऐसा शुभ अवसर आया है जब श्रावण मास में क्रमशः दूसरे एवं चौथे सोमवार को प्रदोष अर्थात पूजा काल में त्रयोदशी तिथि पड़ रही है जो जन सामान्य के साथ-साथ पूरे देश के लिए बहुत शुभ फलदाई योग है
राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज आईडीपीएल में संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि आज दोपहर 12:10 तक द्वादशी तथा उसके उपरांत त्रयोदशी तिथि होने से सोम प्रदोष व्रत हो गया है जोर श्रद्धालुओं सहित पूरे देश पर भगवान शिव की कृपा का संकेत कर रहा है इस दिन स्वयं एवं परिवार के कल्याण के लिए व्रत करने से जहां परिवार का कल्याण होगा वहीं राष्ट्रीय कल्याण के लिए व्रत रखने एवं शिव अर्चन करने से पूरे देश के लिए शुभ रहेगा
मुख्यमंत्री द्वारा ज्योतिष वैज्ञानिक सम्मान से सम्मानित आचार्य डॉक्टर घिल्डियाल आगे बताते हैं कि इस दिन मन का स्वामी चंद्रमा देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु में संचार करेगा इससे साधकों को व्रत एवं पूजन से जहां एक तरफ आध्यात्मिक ऊंचाई मिलेगी तो दूसरी तरफ लक्ष्मी सदैव सुमुखी प्र ददाति शंभू शिव पुराण के उक्त कथन से सभी भक्तों को धन-धान्य की प्राप्ति होगी इस वर्ष सावन में दो सोमवार को क्रमशः दूसरे एवं चौथे को प्रदोष पढ़ने से बहुत अद्भुत संयोग बना है डॉक्टर घिल्डियाल ने बताया कि 11 अगस्त को विगत 2 माह से वक्री चल रहे देव गुरु बृहस्पति के मार्गी होने से सौरमंडल में चल रही हलचल का पृथ्वी लोक पर राशि अनुसार प्रभाव पड़ेगा यह प्रभाव सकारात्मक रहे इस हेतु श्रद्धालु अपनी अपनी राशि के अनुसार पूजन सामग्री से पूजा करें तो सभी शुभ फलों की प्राप्ति होगी
राशि अनुसार पूजन सामग्री
मेष मिश्रित तिल एवं बेलपत्र वृष शंख का जल एवं दूध मिथुन जो एवं बेलपत्र कर्क दूध दही घी सिंह शहद एवं जल कन्या जो एवं बिल्व पत्र तुला सफेद तिल एवं जल वृश्चिक मिश्रित गुण एवं जल धनु जो तिल बिल्वपत्र मकर काले तिल एवं दूध मिला भजन कुंभ काले तिल बिल्वपत्र मीन जो काले तिल एवं बिल्व पत्रों से पूजन करें कर रहा है इस दिन स्वयं एवं परिवार के कल्याण के लिए व्रत करने से जहां परिवार का कल्याण होगा वहीं राष्ट्रीय कल्याण के लिए व्रत रखने एवं शिव अर्चन करने से पूरे देश के लिए शुभ रहेगा
मुख्यमंत्री द्वारा ज्योतिष वैज्ञानिक सम्मान से सम्मानित आचार्य डॉक्टर घिल्डियाल आगे बताते हैं कि इस दिन मन का स्वामी चंद्रमा देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु में संचार करेगा इससे साधकों को व्रत एवं पूजन से जहां एक तरफ आध्यात्मिक ऊंचाई मिलेगी तो दूसरी तरफ लक्ष्मी सदैव सुमुखी प्र ददाति शंभू शिव पुराण के उक्त कथन से सभी भक्तों को धन-धान्य की प्राप्ति होगी इस वर्ष सावन में दो सोमवार को क्रमशः दूसरे एवं चौथे को प्रदोष पढ़ने से बहुत अद्भुत संयोग बना है डॉक्टर घिल्डियाल ने बताया कि 11 अगस्त को विगत 2 माह से वक्री चल रहे देव गुरु बृहस्पति के मार्गी होने से सौरमंडल में चल रही हलचल का पृथ्वी लोक पर राशि अनुसार प्रभाव पड़ेगा यह प्रभाव सकारात्मक रहे इस हेतु श्रद्धालु अपनी अपनी राशि के अनुसार पूजन सामग्री से पूजा करें तो सभी शुभ फलों की प्राप्ति होगी
राशि अनुसार पूजन सामग्री
मेष मिश्रि तिल एवं बेलपत्र वृष शंख का जल एवं दूध मिथुन जौ एवं बेलपत्र कर्क दूध दही घी सिंह शहद एवं जल कन्या जौ एवं बिल्व पत्र तुला सफेद तिल एवं जल वृश्चिक मिश्रित गुड एवं जल धनु जौ तिल बिल्वपत्र मकर काले तिल एवं दूध कुंभ काले तिल बिल्वपत्र मीन जौ काले तिल एवं बिल्व पत्रों से पूजन करें।


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