वारिश्री पन्त 
इससे पहले की मैं कुछ लिखना शुरू करूँ, एक बात स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि मैं देह व्यवसाय, जिसको वेश्यावृत्ति नाम भी दिया गया है, के हक में कतई नहीं हूँ।कोई लड़की या स्त्री अपना शरीर चाहे मजबूरी में बेचे या फिर किसी लोभ और लाभ की चाह में, गलत ही कहूँगी। मैं सिर्फ मौजूदा हालात के मद्देनजर अपनी राय रख रही हूँ। आज जबकि देह व्यवसाय पूरी दुनिया में छाया हुआ है और यह चाहे-अनचाहे समाज में अलग-अलग शक्ल में जगह बना चुका है तो इसको नकारा नहीं जा सकता है। वेश्यावृत्ति शब्द से शायद ही कोई व्यत्तिफ अनजान होगा। अगर शब्दकोष में देखा जाए तो वेश्यावृत्ति का अर्थ पैसे की एवज में अपना शरीर किसी पर पुरुष को सौंप देना है। यानि, शारीरिक संसर्ग करना। यह कतई गर्व की बात नहीं है कि भारत वेश्यावृत्ति के लिए गढ़ बन चुका है। किसी भी सभ्य समाज और देश के लिए बेहद शर्म और लज्जा का विषय है कि कोई स्त्री या युवती अपना देह किसी को भी सिर्फ पैसे की खातिर सौंपने को मजबूर है। यह बात अलग है कि इस धंधे में अलग-अलग तबके की ऐसी लड़कियां भी आ रही हैं, जिनके लिए यह मजबूरी से ज्यादा अपने शौक पूरे करने या पिफर ऊंची सोसाइटी में घुलने-मिलने का मौका है। इसके बावजूद इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इस काम में लगी अधिकाँश लड़कियां बेहद गरीब घरों से होती हैं या पिफर उनको कहीं से अपहरण कर के चकलों में लाया जाता है और उनको बेच कर दलाल निकल जाते हैं।
दुनिया में एड्स जैसी जानलेवा बीमारियों के लिए सिर्फ और सिर्फ सेक्स तथा अवैध रिश्तों को जिम्मेदार माना जाता है। जो लोग चकलों में जाते हैं और पैसा दे कर देह सुख खरीदते हैं, उनको इस तरह की प्राण घातक बीमारी होने की आशंका बहुत ज्यादा होती है। देश के कई हिस्सों में चकले खुल कर चलते हैं और सरकार इनको रोक पाने में नाकाम साबित हो रही है। भारत में ज्यादातर लड़कियों को इस धंधे में जबरन डाला जाता है। आधिकारिक राष्ट्रीय रिकाॅर्ड के मुताबिक हर आठ मिनट में एक लड़की गायब हो जाती है। साल 2011 की रिपोर्ट के मुताबिक (केंद्र सरकार की) के मुताबिक 35 हजार लड़कियां गायब हुई थीं। इनके बारे में माना जाता है कि अधिकांश को जबरन वेश्यावृत्ति में धकेल कर उनका जीवन जहाँ नरक बना दिया जाता है, वहीँ इस धंधे में आसानी से आने वाले पैसे को देख कर दलालों और लड़कियों को प्रोत्साहन मिलता तो है ही साथ ही असुरक्षित यौन क्रिया के चलते एड्स जैसी बीमारियों के पफैलते रहने का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
यह चर्चा गाहे-बगाहे उठती रहती है कि अगर वेश्यावृत्ति को वैध कर दिया जाए तो क्या होगा?क्या यौन अपराध रुक जाएंगे और यौन सम्बन्धी रोक कम हो जाएंगे?इस बारे में अलग-अलग तरह की राय सामने आती रहती हैं, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा होने से कुछ बातों पर तो रोक लग ही सकती हैं। मसलन सबसे पहले तो इसको व्यवसाय का दर्जा मिलने से सभी सेक्स वर्कर को रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। रजिस्ट्रेशन उसका ही होना चाहिए, जो निर्धारित आयु सीमा को पार करती हों। साथ ही उसका स्वास्थ्य सम्बन्धी परीक्षण लगातार होता रहे। यह इसलिए कि यौन संपर्क के कारण कोई यौन रोग किसी को न हो। रजिस्ट्रेशन उन्हीं का होना चाहिए, जो स्वेच्छा से इस काम में आई हों। गरीबी और परिवार पालने की मजबूरी के कारण भी कई लड़कियां और औरतें इस धंधे में लगातार उतर रही हैं। यह सरकार का पफर्ज है कि ऐसी लड़कियों और महिलाओं को बचाया जाए, जिनको जबरन इस धंधे में धकेला गया हो। रजिस्ट्रेशन में यह काॅलम भी होना ही चाहिए कि वे कहाँ से आई हैं और किस लिए या किस तरह इस क्षेत्र में आई हैं। मजबूर तो नहीं किया गया।पुलिस का काम है कि लाइसेंस्ड यौन स्थलों के अलावा बाकी के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाए। यकीन जानिये, इससे बहुत पफर्क पड़ेगा। एक तो लड़कियों की किडनेपिंग और उनको फुसला कर इस धंधे में उतारने का खेल रुक जाएगा या कम हो जाएगा, दूसरा इस धंधे में लगे दलालों और अपराधियों के बारे जानकारी मिल जाएगी। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करने में आसानी हो जाएगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 80 फीसदी लड़कियों को इस धंधे में अभी जबरन या फिर धोखे से डाला जा रहा है। भारत में पश्चिम बंगाल, असोम और नेपाल से लड़कियों को बहला-फुसला कर या अपहरण कर के इस धंधे में डाला जा रहा है। देश में मुंबई, कोलकाता और दिल्ली में यह धंधा बहुत ज्यादा है। वैसे निर्धारित चकलों के लिए तो कानून बनाया जा सकता है लेकिन उच्च श्रेणी के काॅल गल्र्स को उनके धंधे से रोक पाना फिर भी मुश्किल होगा।
वेश्यावृत्ति को कई देशों में व्यवसाय का दर्जा मिला हुआ है। वहां की सरकारों ने भी यही देख के यह कदम उठाया कि वे इसको पूरी तरह रोक नहीं पा रहे हैं। व्यवसाय के वैध होने से वे इसको नियमों में बाँध पाए हैं। वेश्यावृत्ति घृणित धंधा है लेकिन ऐसा सोचने वाले भी हैं कि इससे बलात्कार जैसी समस्याओं में कुछ हद तक कमी लाइ जा सकती है। मेरा मानना है कि वेश्यावृत्ति को वैध करने और बलात्कार में कोई सम्बन्ध नहीं है। बलात्कार करने वालों में मानसिक विकृति होती है। वेश्यावृत्ति को वैध रूप देने के बाद विशेषज्ञ स्वंयसेवी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है। वे चकलों में जा के ऐसी लड़कियों का पता कर सकती हैं कि उनको जबरन इस पेशे में लाया गया है या फिर वे खुद ही आई हैं। रजिस्ट्रेशन सिर्फ उन लड़कियों का होना चाहिए, जो स्वेच्छा से यह काम करना चाहे। मैं एक बार फिर यह साफ करना चाहती हूँ कि मैं वेश्यावृत्ति के हक में बिल्कुल नहीं हूँ। इस पर सरकार पूरी तरह रोक लगा सके तो बहुत अच्छा। जो मुमकिन नहीं है। लिहाजा, कानून बना कर इसको वैधता प्रदान आकर बाकी दिक्कतों और समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

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