देहरादून। स्थानान्तरण निति लागू होने के बाद जनपद से प्रशासनिक आधार पर स्थानान्तरित किये गये अधिकारी दोबारा पांच वर्ष तक उस जनपद में वापस नहीं आ सकेंगे। उत्तराखण्ड स्थानान्तरण निति के अनुसार 7 हजार फिट से अधिक ऊंचाई पर तैनाती का एक वर्ष दुर्गम में तैनाती के 2 वर्ष के बराबर माना जायेगा। स्थानान्तरण के तीन प्रकार होंगे। जिसके सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र, दुर्गम से सुगम क्षेत्र व अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण होगा।
मुख्य सचिव ने मुगलवार को सभी विभागों को वर्ष 2017-18 में होने वाले स्थानान्तरण को लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिये हैं। जारी के गये पत्र में कहा गया है कि सभी विभागाध्यक्ष 31 मार्च तक स्थानान्तरण होने वाले स्थलों को अनिवार्य रूप से चिन्हीकरण कर लें। सभी विभागों को आदेश दिये गये हैं कि वह एक अप्रैल तक शासन स्तर, विभागाध्यक्ष स्तर, मंडल स्तर तथा जनपद स्तर पर स्थानान्तरण समितियों गठन कर लें। प्रत्येक संवर्ग के लिए सुगम व दुर्गम क्षेत्र कार्यस्थल, पात्र कर्मिकों, उपलब्ध एवं संभावित रिक्तियों की सूची 15 अप्रैल का वेबसाईट पर प्रकाशित करने को कहा गया है। अनिवार्य स्थानान्तरण के लिए कार्मिकों से 20 अप्रैल तक 10 इच्छिल स्थानों के विकल्प मांगे जायेंगे। अनुरोध के आधार पर 30 अप्रैल तक आवेदन करने होंगे। अनिवार्य सथानान्तरण के पात्र कार्मिकों के विकल्प आवेदन प्राप्त करने के अंतिम तिथि 15 मई निर्धारित की गई है। स्थानान्तरण समिति की बैठक 25 मई से 5 जून तक होगी तथा स्थानान्तरण के अंतिम आदेश 10 जून तक जारी कर दिये जायेंगे।
सुगम से दुर्गम क्षेत्र में स्थानांतरण
देहरादून। ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों जिनकी सुगम क्षेत्र में तैनाती की अवधि 4 वर्ष से अधिक हो चुकी हो और उसका सम्पूर्ण सेवा काल सुगम क्षेत्र में 10 वर्ष से अधिक हो और छूट की श्रेणी में न आते हों उन्हें उनकी सुगम क्षेत्र में सम्पूण अवधि की तैनाती के अनुसार अवरोही क्रम में रखते हुए संबंधित संवर्ग के दुर्गम क्षेत्र में कुछ रिक्तियों की उपलब्धता सीमा तक ही स्थानांतरण किया जायेगा। कर्मिकों से दुर्गम के दस स्थानो के लिए विकल्प मांगे जायेंगे।
दुर्गम से सुगम क्षेत्र में स्थानांतरण
देहरादून। दुर्गम क्षेत्र में अपनी तैनाती के स्थान पर 3 वर्ष या उससे अधिक तैनाती वाले कर्मिकों को अनिवार्य रूप से स्थानान्तरण किया जायेगा। दुर्गम से सुगम क्षेत्र में स्थानान्तरण के लिए केवल वही अवधि ली जायेगी जिसमें कार्मिक वास्तविक रूप से दुर्गम स्थान पर तैनात हो। इस दौरान यदि कार्मिक एक वर्ष या एक माह की अवधि का अवकाश लेता है तो उसे दुर्गम में तैनाती नहीं मानी जायेगी।
अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण
देहरादून। अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण रिक्तियों के सापेक्ष ही किया जायेगा। इसमें भरे हुए पदों व कार्यस्थलों के लिए अनुरोध नहीं माने जायेंगे। यहां यह कहा जा सकता है अगर यह निति लागू हुई तो कार्यालयों से अटैच मैंट का खेल खत्म हो जायेगा। सुगम से दुर्गम क्षेत्र के लिए कोई भी कार्मिक आवेदन के लिए पात्र होगा। अनुरोध के आधार पर गंभीर रूप से रोग ग्रस्त व विकलांग कार्मिकों, मानसिक रूप से विक्षिप्त एवं लाचार बच्चों के माता पिता, सेवारत पति पत्नि जिना इकलौता पुत्र व पुत्री विकलांग हो, सरकार की सेवा में कार्यरत पति व पत्नी सामान्य श्रेणी के स्थल, विधवा, विधुर, सक्षम न्यायालय के आदेश से घोषित परित्यक्ता एवं तलाकशुदा कार्मिक, दुगर्म क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र के आधार पर आवेदन कर सकता है।
समूह क व ख के अधिकारी गृह जनपद में नहीं होंगे तैनात
देहरादून। स्थानान्तरण समिति को विचार करना होगा कि समूह क एवं ख के अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं किया जायेगा। समूह ग के लिपिकीय एवं गैर प्रशासकीय कार्मिको तथा समूह घ के कार्मिकों को उनके गृह जनपद में तैनात किया जा सकेगा। प्रशासनिक आधार पर स्थानान्तरण सुगम से सुगम में नहीं किया जायेगा तथा प्रशासनिक आधार पर हटाये गये कार्मिक को किसी भी दशा में पुनः उसी जनपद व स्थान पर 5 वर्ष तक तैनात नहीं किया जा सकेगा।
संघों के पदाधिकारी रहते नहीं होगा स्थानान्तरण
देहरादून। सरकारी सेवकों के मान्यता प्राप्त संघो के अध्यक्ष व सचिव जिनमें जिला शाखाओं के अध्यक्ष व सचिव भी शामिल हैं। इनके स्थानान्तरण उनके संगठन के पदाधिकारी रहते या फिर 2 वर्ष की अवधि से पहले नहीं किया जायेगा।

Post A Comment: