उत्तराखंड नीति आयोग के हेल्थ इंडेक्स में 15वें नम्बर पर आ गया है. नीति आयोग की इस रिपोर्ट के बाद वो सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं, जिनको लेकर स्वास्थ्य महकमा अपनी पीठ थपथपाता है. हेल्थ इंडेक्स से यह साफ हो गया है कि स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने की बजाय और खराब हुई हैं.
पहाड़ में डॉक्टरों की कमी, मशीनों का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति काफी खराब हो चली है. इतना ही नहीं, इसे लेकर एमबीबीएस के छात्रों से बॉण्ड तक भरवाये गये थे, ताकि दूरस्थ इलाकों से लेकर मैदानी इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकें. लेकिन अब यह सारे दावे हवा होते नजर आ रहे हैं.
नीति आयोग की रिपोर्ट में उत्तराखंड 45.22 अंकों के साथ 15वें स्थान पर है. उत्तराखंड एकमात्र राज्य है जिसका एम्पॉवर्ड एक्शन ग्रुप के 8 राज्यों में ग्राफ गिरा है. हेल्दी स्टेट्स, प्रोग्रेसिव इंडिया शीर्षक की इस रिपोर्ट में उत्तराखंड की स्थिति सबसे चौंकाने वाली है. प्रदेश में बाल मृत्यु दर ही नहीं बल्कि मातृ मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी हुई है.
वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि मार्च 2018 तक हमारा टारगेट है कि सभी जगह चिकित्सक अपनी जगहों पर पहुंच जाएं, लेकिन अभी हम केवल जिला अस्पताल, बेस अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में चिकित्सक पहुंचाएंगे ताकि मरीजों को अपने ब्लॉक हास्पिटल से बाहर जाना नहीं पड़े.
पहाड़ में डॉक्टरों की कमी, मशीनों का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति काफी खराब हो चली है. इतना ही नहीं, इसे लेकर एमबीबीएस के छात्रों से बॉण्ड तक भरवाये गये थे, ताकि दूरस्थ इलाकों से लेकर मैदानी इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकें. लेकिन अब यह सारे दावे हवा होते नजर आ रहे हैं.
नीति आयोग की रिपोर्ट में उत्तराखंड 45.22 अंकों के साथ 15वें स्थान पर है. उत्तराखंड एकमात्र राज्य है जिसका एम्पॉवर्ड एक्शन ग्रुप के 8 राज्यों में ग्राफ गिरा है. हेल्दी स्टेट्स, प्रोग्रेसिव इंडिया शीर्षक की इस रिपोर्ट में उत्तराखंड की स्थिति सबसे चौंकाने वाली है. प्रदेश में बाल मृत्यु दर ही नहीं बल्कि मातृ मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी हुई है.
वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि मार्च 2018 तक हमारा टारगेट है कि सभी जगह चिकित्सक अपनी जगहों पर पहुंच जाएं, लेकिन अभी हम केवल जिला अस्पताल, बेस अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में चिकित्सक पहुंचाएंगे ताकि मरीजों को अपने ब्लॉक हास्पिटल से बाहर जाना नहीं पड़े.


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