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देहरादून। सामाजिक कार्यकर्ता व सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सुभाष शर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की शिक्षिका पत्नी सुनीता रावत सिर्फ हाईस्कूल पास हैं। उन्होंने कहा कि जब से वह नौकरी कर रही हंै तब से लेकर आज तक उनके वेतन की रिकवरी की जाये। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार के मुखिया को अब जीरो टाॅलरेंस के नारे को पूर्ण रूप से बंद कर देना चाहिए। कहा कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगें, सुरक्षा की उन्हें कोई जरूरत नहीं है।
उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुभाष शर्मा ने कहा कि 21 दिन पूर्व उन्होंने प्रदेश सरकार के मुखिया को चुनौती दी है और अगर उनकी चुनौती गलत होती तो आज वह सलाखों के पीछे होते। उनका कहना है कि 22 वर्षों से सुनीता रावत गलत प्रमाण पत्रों के माध्यम से शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही हंै। भाजपा की सरकारें आई और उनके द्वारा लाभ लिया गया। उनका कहना है कि हाईस्कूल करने के बाद मध्यमा व उसके बाद शास्त्री का सर्टिफिकेट हासिल किया और बाद में किसी संस्थान से बीएड किया। उनका कहना है कि बीएड करने के बाद 2006 में एलटी ग्रेड में प्रोन्नति ले ली जो आज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अजबपुर कलां में कार्यरत है और इस मामले की जांच की जानी चाहिए। उनका कहना है कि जब आरटीआई के तहत रिपोर्ट मांगी गई तो एक पैरे में लिखा गया है कि यह व्यक्तिगत है और जिसका उल्लेख नहीं किया जा सकता है लेकिन आज तक इस ओर किसी भी प्रकार का कोई जवाब नहीं दिया गया और मात्र इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक इसी प्रकार के केस में आदेश दिया कि सरकारी नौकरी में कार्यरत कोई भी व्यक्तिगत नहीं हो सकता है और उसे जानकारी देनी ही पडेगी लेकिन यहां पर इसका अनुपालन नहीं किया गया है।  उनका कहना है कि लगातार जीरो टाॅलरेंस की बात की जा रही है लेकिन जीरों टाॅलरेंस है क्यां, प्रदेश के मुखिया स्वयं ही अपने घर में घिरे हुए है और पात्र लोगों के साथ दुव्र्यवहार किया जा रहा है और इस मामले को लेकर एक पत्र डीआईजी एसआईटी को भी दी गई है और अनुरोध किया गया है जिस प्रकार से 46 शिक्षकों की जांच की गई है उसी प्रकार इस जांच को भी किया जाये और शीघ्र ही इसमें तेजी लाई जायेे। उनका कहना है कि वह लगातार कह रहे है कि सुनीता रावत के प्रमाण पत्र फर्जी है और वह उनके साथ व्यक्तिगत वैमनस्य नहीं रखते है और उनका बड़ा आदर करते है। उनका कहना है कि अगर उनके आरोप झूठे हुए तो वह पैर छूकर माफी मांग लेंगें, लेकिन जब तक इस मामले में कार्रवाई नहीं होती है वह लगातार इसके उठाते रहेंगें। 
उनका कहना है कि इस मामले में सीएम का हस्तक्षेप है ओर कुछ अधिकारी मिले है जो सही जानकारी को सार्वजनिक नहीं होने देना चाह रहे है। उनका कहना है कि मांगी गई सूचना असंवैधानिक रूप से रोका गया है और दूसरी बाद सूचना मांगी गई है। उनका कहना है कि शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा के साथ जीरो टाॅलरेंस के साथ दुव्र्यवहार किया गया। उनका कहना है कि शिक्षिका सुनीता रावत को अपना संदेह भी दूर करना चाहिए और नियुक्ति से लेकर अब तक की नौकरी से मिले वेतन की रिकवरी की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस मामले की एसआईटी से जांच नहीं होती है तो वह कोर्ट की शरण लेंगें।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार से हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाया जा रहा है और जिस प्रकार से विधानसभा रिस्पना नदी में बनी हुई है और पुश्ते पीछे गये है। पहले विधानसभा को तोडने की कार्यवाही की जानी चाहिए और उसके बाद बस्ती उजाड़ने का काम किया जाना चाहिए वह स्वयं ही बस्तीवासियों से हटने का अनुरोध करेंगें। उनका कहना है कि अधिकारी 1938 के नक्शे को आधार मान रही है और अब तक जितने अधिकारी थे जिन्होंने नक्शा पास किया है उन पर भी कार्यवाही की जानी चाहिए और अतिक्रमण के नाम पर लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है, अतिक्रमण की कार्यवाही विधानसभा से शुरू करते हुए फिर अन्य सरकारी भवनांे में की जाये। उनका कहना है कि सच्चाई उजागर करने में जान भी जाये तो कोई परवाह नहीं है और सुरक्षा की भी जरूरत नहीं है और भ्रष्टाचार के खिलाफ आखिरी दम तक लडूंगा। सुनीता रावत पाक साफ है तो चरण छूकर माफी मांग लूंगा। उनका कहना है कि कांग्रेस नेताओं की पत्नियां भी ऐसे ही दौर से गुजर रही हंै जिससे वह सामने नहीं आ रहे है। 
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देहरादून। अपनी विवादित कार्यशैली को लेकर अक्सर विवादों मेें रहने वाले नगर निगम के अधिकारी किस तरह से शहर को सफाई की प्रयोगशाला बनाने पर तुले हुए हैं इसके कईं उदाहरण यूं तो पहले भी सामने आ चुके हैं लेकिन न सफाई व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। वहीं नगर आयुक्त की कार्यशैली को लेकर दूनवासियों में रोष व्याप्त है। 
    बरसात से पूर्व शहर के नालों-खालों और नालियों की सफाई करवाने में नाकाम रहे नगर आयुक्त विजय जोगदण्डे की कार्यशैली से खफा रहने पर राज्यपाल ने उन्हे पिछले दिनों तलब भी किया था इसके बावजूद भी वे अपनी कार्यशैली में बदलाव नहीं ला पा रहे हैं। निगम वैसे ही सफाई कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है और उन्होने चंद सफाई कर्मचारियों से कोल्हू के बैल की तरह काम करवाना शुरू कर रखा है। मानसून से पूर्व निगम प्रशासन दावा करता रहा कि उसने नालों-खालों की साफ-सफाई का टेण्डर कर दिया है और जल्द ही नालों की सफाई शुरू करवा दी जाएगी। किन्तु दो माह बीतने के बाद भी नालो-नालियों की साफ-सफाई नहीं हो पायी जिसके कारण इन नालों में गंदगी भर गई और भारी बारिश में यह नाले ओवर फ्रलों होने से गंदा पानी लोगों के घरों में घुस गया जिसके कारण सैकड़ों लोगों का काफी नुकसान हुआ। वहीं सवाल यह उठ रहा है कि जब नालों की सफाई के लिए टेण्डर हो गए थे तो आखिर सफाई क्यों नहीं हुई। दो माह तक निगम अधिकारी क्या इस इंतजार में थे कि लोगों का बहुत नुकसान हो जाए। मानसून से पूर्व शहर के नालों-खालों और नालियों की सफाई कराने में नाकाम हो चुके नगर आयुक्त ने अब एक तुगलकी फरमान निकाला है। निगम अधिकारियों को अब बरसातों में नाले-नालियों की सफाई करवाने की सुध आयी है। इसके लिए कोई टेण्डर नहीं अलग से कोई कर्मचारी नहीं बल्कि निगम अब हर वार्ड से 2-2 सफाई कर्मचारी लेकर इनसे नाले-नालिया साफ करवाएगा। हैरानी की बात यह है कि यह निर्णय मंगलवार से ही लागू कर दिया गया है। सवाल यह है कि विजय जोगदण्डे को नगर आयुक्त का पद संभाले दस माह हो चुके हैं किन्तु ऐसा लगता है कि आज तक भी वे निगम क्षेत्रा की भौगोलिक परिस्थिति से वाकिफ नहीं हो पाए हैं। कुछ समय पूर्व की बात है जब 75 कर्मचारी 10 वार्डों में रात्रि की सफाई के लिए रखे गए थे। कुछ माह तक तो सब कुछ ठीक चलता रहा, किन्तु पिछले माह इन कर्मचारियों से कभी रायपुर, कभी जाखन तो कभी एफआरआई में सफाई के लिए भेजा गया। यही नहीं कुछ दिन पूर्व इन कर्मचारियों को रात्रि से हटाकर अब दिन की सफाई वो भी आपदा में भेज दिया गया। जिससे रात्रि की सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई। अब एक और तुगलकी फरमान ने निगम के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या शहर की सफाई व्यवस्था इसी तरह से प्रयोगों पर चलेगी। अब हर वार्ड से 2-2 सफाई कर्मचारियों को उधार पर लेकर नाले-नालियों की सफाई कराने की तैयारी की जा रही है। नाला गैंग और उस टेण्डर का कुछ अता-पता नहीं जिनसे नाले-नालियों की सफाई करायी जाती है। इस तरह से हैल्थ मैनुअल का भी खुला उल्लंघन किया है।
देहरादून। सूबे की त्रिवेन्द्र सरकार ने तबादलों में पारदर्शिता लाने के लिए ट्रांस्फर एक्ट बनाया था लेकिन अधिकारियों से इसकी व्याख्या अपने अनुसार करनी शुरू कर दी है। प्रदेश के सबसे तेज तरार मंत्री माने जाने वाले कृषि मंत्री के विभाग में ही अधिकारियों ने तबादलों को लेकर चहेतों को सैट करना शुरू कर दिया है। कई वर्षो से मैदानी क्षेत्रों में जमे आधा दर्जन मंडी सहायकों को पहाड़ में चढ़ाने के बजाए मनमाफिक नियुक्ति दे दी है। यहां विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि 12 साल से ऋषिकेश मंड़ी में जमें मंडी सहायक केपी सिंह की चंद महिनों बाद ही मनमाफिक नियुक्ति देते हुए उन्हें देहरादून से दोबारा ऋषिकेश मंडी में ही तैनात कर दिया गया है। 
सूबे में मुख्यमंत्री व कैबिनेट से पहाड़ में अधिकारियों की कमियों के चलते व ट्रांस्फर में अधिकारियों के खेल का खत्म करने के लिए स्थानान्तरण निति बनाई थी। साथ ही सभी विभाग के अधिकारियों को आदेश दिये थे कि 10 जून तक स्थानान्तरण कर दिये जाएं और लम्बे समय से मैदानी क्षेत्रों में जमें अधिकारियों को पहाड़ में चढाया जाए। लेकिन कुछ विभाग के अधिकारियों ने इस नियमावली की व्याख्या अपने हिसाब से करनी शुरू कर दी है। जिसका ताजा उदाहरण उत्तराखण्ड कृषि विपणन बोर्ड निदेशालय में देखने को मिला। जिसमें महाप्रबन्धक (प्रशासन) बीएस चलाल के माध्यम से जारी की गई ट्रास्फर लिस्ट में 6 मंडी सहायकों के स्थानान्तरण किये गये। लेकिन यह लिस्ट जारी होने से पहले ही विवादों में आ गयी। क्योंकि जिन 6 मंडी सहायकों के स्थानान्तरण किये गये है वह मैदानी क्षेत्रों में लम्बे समय से तैनात है उनमें से किसी का भी पहाड़ में स्थानान्तरण नहीं किया गया है। महाप्रबंधक बीएस चलाल ने मंडी सहायक जगदीश प्रसाद का स्थानान्तरण रुड़की से विकासनगर, बनमाली को सितारगंज से किच्छा, किशनपाल सिंह का देहरादून से ऋषिकेश, राजीव कुमार का मंगलौर से रुड़की, बृजपाल सिंह का विकासनगर से हरिद्वार व चन्द्रशेखर का ऋषिकेश से देहरादून किया गया है। इनमें से किशनपाल सिंह पिछले 12 सालों से ऋषिकेश में तैनात था और कुछ महीनों पहले ही उसका स्थानान्तरण ऋषिकेश से देहरादून किया गया था लेकिन कुछ महीनों बाद ही उसकी वापसी ऋषिकेश मंड़ी में कर दिया गया। जिससे साफ जाहिर होता है कि किशनपाल को ऋषिकेश मंड़ी से ऐसा क्या लालच है जो वह वहां का मोह छोड़ने को तैयार नहीं है।  
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जनपद टिहरी के ढालवाला क्षेत्र में खुले शराब के ठेके पर खुल हो रही है उपभोक्ताओं से खुलेआम लूट -खसोट
- बोतल पर अंकित दर से अधिक वसूले जा रहे हैं पैसे

 ऋषिकेश, जनपद टिहरी गढ़वाल के अंतर्गत ढालवाला में खुले जनपद के सबसे महंगे ठेके शराब के ठेके शराब के ठेके पर लोगों की जेब पर डाला जा रहा है प्रशासन की मिलीभगत से खुलेआम टाका टाका ज्ञात है कि मुनि की रेती थाना अंतर्गत ढालवाला क्षेत्र में लोगों के भारी विरोध के बावजूद जनपद का सबसे बड़ा महंगा ठेका खोला गया है लेकिन ठेकेदार की आबकारी विभाग से लेकर जिला प्रशासन से मिलीभगत होने के कारण बोतल पर अंकित दरों से 4 गुना दरें उपभोक्ताओं से वसूली जा रही है जिससे उपभोक्ताओं में ठेकेदार के विरुद्ध भारी रोष उत्पन्न हो रहा है जिनका कहना है कि  उक्त ठेकेदार की प्रशासन से मिलीभगत होने के चलते उपभोक्ताओं की जेब पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है जबकि स्थानीय नागरिक इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं जिन्होंने चेतावनी दी है कि ठेकेदार ने यदि बोतल पर अंकित  अधिक मूल्य वसूला गया स ठेके का खुलेआम विरोध करेंगे।
- गंगा का अस्तित्व खतरे में पड़ा
ऋषिकेश। उच्च न्यायालय  तथा एनजीटी के गंगा से 200 मीटर की परिधि में लगाई गई नए निर्माण पर रोक के बावजूद रुड़की हरिद्वार विकास प्राधिकरण की मिलीभगत के चलते जनपद टिहरी गढ़वाल के तपोवन क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में अवैध निर्माण बेखौफ जारी है उल्लेखनीय है कि एनजीटी द्वारा हरिद्वार से लेकर ब्रह्मपुरी क्षेत्र तक गंगा के दोनों ओर 200 मीटर के दायरे में सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर रोक लगा रखी है लेकिन उसके बावजूद हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते तपोवन स्थिति  नीर गुड्डू में होम इज  रेजिडेंस के निकट हो रहे सरकारी जमीन क जमीदोज  कर अवैध सडक निर्माण के साथ  पूरे तपोवन क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में अवैध निर्माण लगातार जारी है इतना ही नहीं ऋषिकेश स्थित कोयल ग्रांट जो कि गंगा से सटा क्षेत्र है मैं भी अवैध कंपलेक्स का निर्माण किया जा रहा है यहां तक कि मुख्य मार्ग रेलवे रोड पर भी इसी प्रकार के 1 दर्जन से अधिक निर्माण कार्य किए जा रहे हैं जिनका मलवा सड़क के बीचो-बीच डालकर सड़क भी अवरुद्ध की गई है जिसके प्रति नगर निगम के अधिकारी कर्मचारी भी आंखें मूंदे हैं जिससे आवागमन में भी लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है   नीर गड्डू में जारी विशालकाय सडक के निर्माण के चलते वर्षो पुराने पेडो की भी बलि चढा दी गई है इस कार्य को लेकर लोगों में रोष जारी है जिससे गंगा का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है इस संबंध में उप जिलाधिकारी नरेंद्र नगर को भी शिकायत की गई है परंतु इस निर्माण कार्य को रोकने की उनकी भी कोई मंशा नजर ना आने के पीछे बड़ा खेल खेलने की साजिश से स्थानीय नागरिक भी बता रहे है जिससे लोगों मे रोष  है जिन्होंने तत्काल उक्त निर्माण कार्य को रोके जाने की मांग करते हुए भविष्य में आंदोलन की बड़ी चेतावनी दी है।
ऋषिकेश 7 जुलाई ! कृषि उत्पादन- मंडी समिति ऋषिकेश  में पिछले काफी समय मंडी समिति मे चल रहा स्थांतरण पोस्टिंग का गोरख धंधा जिसे लेकर कर्मचारीयो- मे रोष उत्पन्न है। जिनका आरोप है कि सरकार की गलत नीतियों के परिणामस्वरूप अधिकारी इसका लाभ उठा रहे है। और अपने चहेतों को मलाईदार पदो वह स्थानो पर नियुक्तिया दे रहे है।इसी के  चलते सहायक  पद पर किशन पाल सिंह का स्थानांतरण होने के बावजूद भी वह ऋषिकेश मैं ही जमा है जिससे कर्मचारियों में रोष उत्पन्न हो रहा है  जिन का कहना है कि यह कर्मचारी दुकानदारों के  नवीनीकरण ,चालान फार्म उनके पंजीकरण केंद्र मैं ले  जाकर  उनके फार्म कटवा रहा है जिसका कुप्रभाव  पर भी पड़ रहा है उनका कहना है कि उक्त कर्मचारी का जब ट्रांसफर हो चुका है तो  उसे ऋषिकेश कार्यालय में कार्य करने से रोका जाए किशन पाल सिंह ऋषिकेश मंडी समिति मे 12 वर्ष तक जमे रहे आज का आदित्य समाचार पत्र ने जब किशन पाल सिंह के बारे समाचार छापा कि 12 वर्षो से एक ही स्थान पर बने हुए है मठाधीश । आखिर सूत्रों के मुताबिक अब ये सुनने मे आ रहा है कि किशन पाल सिंह को फिर से ऋषिकेश लाया जा रहा है अभी एक वर्ष भी नही हुआ किशन पाल सिंह का दून मे स्थांतरण हुए और फिर से किशन पाल सिंह को एक वर्ष के भीतर ही पुनः ऋषिकेश मंडी मे मंडी सहायक आखिर किशन पाल सिंह मे ऐसी कौन सी शहद, व जादुई छड़ी है कि उनके आगे दमदार सिस्टम भी नतमस्तक हो गया है। जबकि नियमावली के अनुसार 3 वर्ष के उपरांत ही कर्मचारियों का स्थानांतरण किये जाने का प्रावधान है। इसमे उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड मंडी भवन रुद्रपुर निदेशालय से मंडी कर्मचारियो से उक्त अवधि के अंतर्गत स्थांतरण हेतु विकल्प लिए गए थे । लेकिन बिना विकल्प लिए नियम विरुद्ध भी स्थांतरण किये गये है ।
ऋषिकेश। जनपद पौड़ी गढ़वाल की नगर पंचायत जोंक के अंतर्गत किए जा रहे गंगा प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जल निगम द्वारा उच्च न्यायालय के  गंगा से दो सौ मीटर की दूरी पर  किए गए निर्माण कार्यों  पर रोक के बावजूद निर्माण कर  खुलेआम  धज्जियां उड़ाई जा रही हैं  उल्लेखनीय है कि  गंगा प्रदूषण  नियंत्रण इकाई द्वारा वेद निकेतन के निकट  लाखों रुपए की लागत से  सेफ्टी टैंक का निर्माण गंगा किनारे अवैध तरीके से किया जा रहा है  जिसे लेकर स्थानीय नागरिकों में रोष व्याप्त है जिनका आरोप है कि  इस सेफ्टी टैंक का  गंदा पानी बरसातों में रिसकर   गंगा जी में जाएगा और गंगा का पानी मैं पीने योग्य नहीं रहेगा  उन्होंने कहा कि  एक और जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा को निर्मल  व स्वच्छत बनाने को लेकर करोड़ों रुपए परियोजना में  खर्च कर रहे हैं वहीं ऋषिकेश के गंगा किनारे इस प्रकार सरकारी विभाग द्वारा अवैध तरीके से किए जा रहे निर्माण कार्य  के कारण प्रधानमंत्री की नमामि गंगे योजना को धक्का लग रहा है जिसे  शीघ्र  जनहित में रोका जाना अत्यंत आवश्यक है  इस निर्माण कार्य को लेकर नगर पंचायत जोंक की अध्यक्ष शकुंतला राजपूत का आरोप है कि  इस निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं हैं जो कि नियम विरुद्ध निर्माण किया जा रहा है जिसमें किसी भी प्रकार की गुणवत्ता का भी ख्याल नहीं रखा गया है निर्माण कार्य  की जांच किया जाना अत्यंत आवश्यक है ।
देहरादून। उत्तराखंड सरकार में अपर सचिव पद पर तैनात डीसी भट्ट शुक्रवार दोपहर नशे में धुत हालत में मिले। अपर सचिव पहले लड़खड़ाते हुए पुलिस मुख्यालय पहुंचे फिर झूमते हुए सड़क किनारे गंदगी में लेट गए। जानकारी के अनुसार,शराब के नशे में धुत अपर सचिव डीसी भट्ट पहले पुलिस मुख्यालय में धौंस दिखाने पहुंचे। लेकिन मुख्यालय में तैनात पुलिस गार्डों ने उन्हें पीएचकयू से बाहर निकाला दिया।इस दौरान अपर सचिव'किसी को कोई कामकरना हो तो बताये'इस बात की हेकड़ी दिखाते नज़र आये।ये वाकया आज उस वक्त का है, जब डीजीपी अनिल रतूड़ी पुलिस मुख्यालय से लंच के वक्त अपने आवास निकल रहे थे, तभी डीसी भट्ट वहां आ धमके। आनन-फानन में मौके पर तैनात पुलिस गार्डों के हाथ-पैर फूल गए। उन्होंने अपर सचिव डीसी भट्ट को बाहर किया और घर जाने की सलाह दी। इस दौरान डीसी भट्ट ढंग से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। उन्हें पुलिस गार्ड किसी तरह पकड़कर बाहर की ओर ले गए। इतना ही नहीं,इसके बाद नशे में चूर अपर सचिव सचिवालय रोड के किनारे पसरी गंदगी पर ही लेट गए। उन्हें ये नहीं पता चल रहा था कि वो हैं कहां।जब हमारी टीम ने भट्ट से बात करनी चाही तो उनकी जुबान इस कदर लड़खड़ा रही थी कि उनका बोला कुछ भी हमारी समझ में नहीं आया।डीपी भट्ट काफी देर तक वहीं बैठे नशे में बड़बड़ाते रहे। सूचना के बाद उनके परिजन उन्हें लेने पहुंचे और उन्हें उठाकर कार में बैठाकर घर ले गये
पुलिस मुख्यालय में नशे में धुत अपर सचिव।जानकारी के अनुसार, सहस्त्रधारा में रहने वाले अपर सचिव डीसी भट्ट कुछ दिन पहले ही निजी सचिव से अपर सचिव पद पर प्रमोट हुए हैं। आज वह नशे में धुत होकर पुलिस मुख्यालय घुस गए। जहां अपने पद की गरिमा का ख्याल न करते हुये ऐसी हालत में नज़र आये कि जिसने भी देखा अवाक रह गया।
देहरादून। ट्रांसफर को लेकर आहत शिक्षिका जिसने सीएम त्रिवेन्द्र रावत के जनता दरबार मे मुख्यमंत्री से अभद्र व्यवहार किया था उसे मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी नई निलंबित कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा की बर्खास्त कर दूंगा। मुख्यमंत्री ने महिला शिक्षिका को तुरन्त गिरफ्तार करने के आदेश दिए।
महिला शिक्षिका का नाम उत्तरा पंत बहुगुणा बताया जा रहा है। उत्तरकाशी के दुर्गम क्षेत्र में प्राथमिक विद्यायल में तैनात है।
 पति की मृत्यु के बाद देहरादुन में तैनाती की मांग कर रही थी। महिला को शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया। 
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देहरादून। सीएम त्रिवेन्द्र रावत के जनता दरबार मे महिला शिक्षिका ने किया मुख्यमंत्री से अभद्र व्यवहार। मुख्यमंत्री
ने कहा की बर्खास्त कर दूंगा। मुख्यमंत्री ने महिला शिक्षिका को तुरन्त गिरफ्तार करने के आदेश दिए।
महिला शिक्षिका का नाम उत्तरा पंत बहुगुणा बताया जा रहा है। उत्तरकाशी के दुर्गम क्षेत्र में प्राथमिक विद्यायल में तैनात है।
 पति की मृत्यु के बाद देहरादुन में तैनाती की मांग कर रही थी।
उत्तरकाशी। मंगलवार को नगरपालिका प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी करवाई की। गंगोत्री राजमार्ग पर सब्जी मंडी की 34 दुकानों पर नगरपालिका  की जेसीबी जमकर बरसीं।
उत्तरकाशी में अतिक्रमण पर पालिका प्रशासन ने बड़ी करवाई की। नगरपालिका प्रशासन की जमीन पर सालो से सब्जी बेचने के लिए अतिक्रमण कर रहे बाहरी व्यापारियों को नगरपालिका प्रशासन ने हटाते हुए कब्जा मुक्त किया।
अतिक्रमण की कार्यवाई से पालिका की जमीन पर पक्के निर्माण वाले अभी भी है कई कब्जेधारी का कब्जा बना हुआ है। हालांकि टीम को थोड़ा बहुत विरोध भी झेलना पड़ा।
ऋषिकेश,(स्वर्गाश्रम)। तीर्थ नगरी ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला क्षेत्र में रसूखदार बिल्डर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण व पौड़ी जिला विकास प्राधिकरण की नाक के नीचे खुलेआम बहुमंजिले निर्माण कार्यो को अंजाम दे रहे है।
गौरतलब है कि विगत कई वर्षों से हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में बैठे अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से स्वर्गाश्रम-लक्ष्मण झूला क्षेत्र में निर्माण कार्य जोरों पर है जिसको रोकने वाले विभाग ही लाचार नजर आ रहे हैं। वही जिला पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर प्रखण्ड में नगरपंचायत जोंक में इस तरह के निर्माण कार्यो की बाढ़ सी आयी हुई है जहाँ मानकों को ताक में रख कर बहुमंजिले होटलों के निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, आश्चर्य जनक बात है कि स्वर्गाश्रम क्षेत्र में पौड़ी जिला विकास प्राधिकरण के एक सदस्य गजेन्द्र नागर भी उक्त निर्माण कार्यों के होने पर अनभिज्ञता प्रकट कर रहे है जो किसी को भी हजम नही होगी, क्योंकि प्राधिकरण के सदस्य का राजनीतिक क्षेत्र व रोजगार भी उसी क्षेत्र में है
जबकि नगर पंचायत जोंक क्षेत्रान्तर्गत किरमोला गांव के वार्ड संख्या 2 में बहुमंजिले निर्माण कार्य जारी है। जिसके चलते जिला विकास प्राधिकरण पौड़ी की लापरवाही इससे ही स्पस्ट हो रही है की  नगर पंचायत जोंक के स्वर्गाश्रम से लेकर किरमोला लक्ष्मण झूला तक पर्यटकों की आमद बढने से प्राधिकरण के नियमों के विपरीत होटलों व गेस्ट हाउसों के निर्माण की बाढ़ आ गयी है, जिनमे मानकों की भी अनदेखी की जा रही है, वही पौड़ी  जिला विकास प्राधिकरण के सदस्य द्वारा निर्माण कार्यों पर अनभिज्ञता प्राधिकरण के कार्यों पर प्रश्न चिन्ह लगा रही है, जहाँ हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण तो निर्माण कार्यो पर आंखे बंद किए हुए हैं वही पौड़ी जिला विकास प्राधिकरण की कार्यशैली भी
सवालो के घेरे में आ गई है।
-बदमाशों ने की महिला की हत्या, पति और बेटी घायल
-फैक्ट्री के प्रोडक्शन मैनेजर के घर में बदमाशों ने किया खूनी तांडव
रुद्रपुर। अज्ञात बदमाशों ने गंगापुर रोड स्थित मां सर्वेश्वरी इन्क्लेव में एक फैक्ट्री के प्रोडक्शन मैनेजर के घर में घुसकर महिला की चाकुओं से गोदकर निर्मम हत्या कर दी और उसके पति और डेढ़ वर्ष की मासूम बेटी को बुरी तरह घायल कर दिया। बदमाश घर से नकदी जेवरात सहित अन्य कीमती माल लूटकर ले गये है। मृतका के पति और बेटी को घायल अवस्था में अस्पताल भर्ती कराया गया है। घटना से जिले में हड़कम्प मचा हुआ है। घटना के बाद आईजी और एसएसपी ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली और पुलिस अधिकारियों को घटना का जल्द खुलासा करने के निर्देश दिये। 
गंगापुर मार्ग पर स्थित मां सर्वेश्वरी इन्क्लेव निवासी एक दवा कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर के पद पर कार्यरत पंकज श्रीवास्तव अपनी पत्नी अर्पणा, 7 वर्षीय पंखुड़ी व डेढ़ वर्षीय पुत्री अक्षिता के साथ रहते हैं। बताया जाता है कि पंखुड़ी शुक्रवार को ही गंगापुर मार्ग स्थित दक्ष रोड पर एक कॉलोनी में अपनी नानी के घर गई थी। घर में पकंज उसकी पत्नी अर्पणा व अक्षता मौजूद थे। शनिवार प्रातः जब घर की नौकरानी काम करने के लिये वहां पहुंची तो उसने रसोई की ग्रिल को उखड़ा देखा। उसे संदेह हुआ जब उसने घर के भीतर जाकर पंकज के कमरे का दरवाजा खोला तो उसके होश उड़ गये।  कमरे में अर्पणा का शव लहुलूहान अवस्था में पड़ा था जबकि पंकज घायल अवस्था में करार रहे थे। वहीं डेढ़ वर्षीय अक्षिता भी घायल पड़ी रो रही थी। घर के भीतर का खौफनाक मंजर देखकर नौकरानी की चीखें निकल गई। उसकी आवाज सुनकर आस पडोघ्स के लोग आ गये और उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलने पर एसएसपी डा- सदानंद दाते, एएसपी देंवेन्द्र पिंचा, एएसपी क्राइम कमलेश उपाध्याय, सीओ स्वतंत्र कुमार, कोतवाल कैलाश भट्ट, एसओजी प्रभारी तुषार बोरा, समेत तमाम पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर आ पहुंचे और उन्होंने नौकरानी से आवश्यक जानकारी लेकर घर का बारीकी से निरीक्षण किया। एसएसपी ने फारेंसिक टीम व डाग स्क्वायड को भी मौके पर बुलाया गया। फारेंसिक टीम ने घटनास्थल व सभी कमरों के साथ ही खिड़की अलमारी आदि से फिंगर प्रिंट लिये। वहीं डाग स्क्वायड भी बुलायागया। डकैतों ने अर्पणा पर चाकू से कई वार किये थे। वहीं उसके पति पंकज व डेंढ़ वर्षीय पुत्री अक्षता को भी नहीं बख्शा। दोनों को गंभीर हालत में उपचार के लिये निजी चिकित्सालय भर्ती कराया गया है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिये भेजा। घटना से लोगों में भारी रोष व्यात है। मामले की सूचना मिलने पर विधायक राजकुमार ठुकराल एवं पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़,ग्राम प्रधान सुरेश गौरी भी घटना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने गहरा रोष जताते हुए पुलिस से डकैतों को पकड़ने को कहा। दोपहर को आईजी जी पूरन सिंह रावत भी घटना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने पुलिस अधिकारियों से घटना के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होनें एसएसपी सदानन्द दाते को घटना का शीघ्र खुलासा करने और घटना में शामिल सभी अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार करने के निर्देश दिये। 
टिहरी। देश भर में रोज ही सैकड़ों की संख्या में धरने, प्रदर्शन, आंदोलन होते हैं लेकिन टिहरी जिले के झील प्रभावित नंदगांव के ग्रामीणों का आंदोलन लाखों का आंदोलन हो गया है। साल 2010 से विस्थापन की मांग को लेकर नंदगांव के ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं और अभी तक ग्रामीण आंदोलन के लिए 20 से 22 लाख रुपये कर्ज ले चुके हैं और विस्थापन के नाम पर इन्हें मिला है झूठा आश्वासन।
टिहरी झील के पानी के उतार-चढ़ाव के चलते नंदगांव में भारी भूस्खलन और भूधंसाव होने पर वर्ष 2002 में 97 परिवारों को पूर्णरूप से विस्थापन किया गया और करीब 47 परिवार आंशिक डूब क्षेत्र की श्रेणी में आए। झील के कारण हो रहे लगातार भूस्खलन और भूधंसाव से इन 47 परिवारों पर भी खतरा बढ़ा और मकानों में दरारें बड़ी हो गई और कई मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए।
कृषि भूमि में धंसाव के चलते ग्रामीणों को अपने खेत छोड़ने पड़े, जिसके बाद से ग्रामीण विस्थापन की मांग करने लगे और 2010 से गांव में ही क्रमिक अनशन, धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। 6 अगस्त, 2012 को 20 ग्रामीण डीएम से मिलने गए। जिनका गाड़ी के किराये से लेकर ज्ञापन, फोटोकॉपी, चाय पानी और भोजन का कुल खर्चा 4260 रुपये था।
उचित आश्वासन नहीं मिलने पर ग्रामीण गांव में ही धरने पर डटे रहे। 7 नवंबर, 2012 को नई टिहरी कलेक्ट्रेट में 15 दिन धरना प्रदर्शन किया गया, जिसका कुल खर्च 13,540 रुपये था। इसी तरह बार-बार 2012 से अभी तक विस्थापन की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन और आंदोलनों में ग्रामीणों का कुल 20 से 22 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
कृषि भूमि तबाह होने से ग्रामीणों की आजीविका का साधन भी नष्ट हो गया है। नाते रिश्तेदारों से कर्ज लेकर और होटलों में काम कर मेहनत मजदूरी कर ग्रामीण किसी तरह अपना आंदोलन जिंदा रखे हुए हैं। लेकिन आज तक उन्हें कोरे आश्वासन ही दिए हैं। अब भी नंदगांव के ग्रामीण 20 दिनों से नई टिहरी पुनर्वास कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
ढालवाला में खुला शराब का ठेका आंदोलनकारियों के विरोध के चलते हुआ भद्रकाली में शिफ्ट
 -भद्र काली मंदिर में भजन कीर्तन कर आंदोलनकारियों ने किया अपना आंदोलन समाप्त
ऋषिकेश,07जून। जनपद टिहरी गढ़वाल के अंतर्गत खुले ढालवाला क्षेत्र में जनता के विरोध के बावजूद शराब के ठेके को लेकर जहां शराब विरोधी आंदोलनकारियों ने अपना ढालवाला में धरना जारी रखा। वही शराब के ठेकेदार ने प्रशासन की सहमति से मोबाइल ठेके को भद्रकाली से ऊपर शिफ्ट कर दिया है उल्लेखनीय है कि बुधवार को ढालवाला में शराब का ठेका मोबाइल वैन में प्रारंभ किया गया था ।जिसके बाद विरोध करने वाले  आठ आंदोलनकारियों को पुलिस ने   शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर एसडीएम के न्यायालय में पेश किया ।जहां से उन्हें देर शाम को  छोड़ दिया गया  था जिसके बाद बृहस्पतिवार को ढालवाला में धरना स्थल पर शराब विरोधी आंदोलनकारी धरने पर बैठ गए वहीं दूसरी ओर भद्रकाली के पास खुले मोबाइल  ठेके को जन भावनाओं के मद्देनजर उप जिलाधिकारी लक्ष्मी राज चौहान तथा पुलिस क्षेत्राधिकारी जेपी जुयाल से हुई वार्ता के बाद शराब के ठेकेदारों द्बारा मोबाइल ठेके को भद्रकाली मंदिर से ऊपर शिफ्ट कर दिया । वही  शराब के ठेकेदार  अरविंद रणावत का कहना था कि  उनका ठेका न  खुलने से उन्हे  प्रतिदिन लाखो    रुपये  की हानी हो रही है दूसरी ओर आंदोलकारियों ने  प्रशासन की कार्यवाही का स्वागत करते हुए अपने आंदोलन को समाप्त कर दिया इस दौरान तहसीलदार    बी,एस.    तोपवाल आबकारी ट्रैक्टर इंसपैैैक्टर प्रेेेरणाा बिष्ट, नरेंद्र नगर व मुनि की रेती के थाना प्रभारी  आर के .सकलानी भी मौजूद थे। उधर  प्रशासन से हुई वार्ताा केन भद्रकाली मंदिर में भजन कीर्तन करने को समाप्त किया  जहां  पूर्व विधायक  गोपाल रावत ,हिमांशु बिजल्वाण अजय रमोला गौरव गौड़,  पूनम पुंडीर,  राजेश महावीर खरोला  ,पदमा  सेमवाल ,बंदना देवी  इंदिरा देवी उनियाल, प्यारी देवी, रीना रावत पुष्पा रावत, सुमन जायसवाल आशा राणा, शांति देवी सहित काफी संख्या में महिलाएं उपस्थित थी।

  ढालवाला में खुला शराब का ठेका ,शराबियों मैं खुशी की लहर
-टिहरी गढ़वाल का सबसे महंगा खुला नो करोड़ में ठेका
शराब की दुकान खुलवाने तथा विरोध करने वाले आपस में उलझै
-शराब छिनकर उस में लगाई आग
शांति व्यवस्था में पुलिस ने विरोध कर रहे हैं आठ लोगों को किया गिरफ्तार
ऋषिकेश,06जून। जनपद टिहरी गढ़वाल के अंतर्गत ढालवाला क्षेत्र में शराब की दुकान का ठेका  स्थानीय लोगों के विरोध को दरकिनार कर  शराब का ठेका पुलिस प्रशासन की देखरेख में खोल दिया गया है  जिसके खुलने के बाद शराब पीने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है  ।हालांकि कुछ लोगों ने शराब के ठेके का विरोध भी किया है शराब का ठेका मोबाइल बैन में शुरू किया गया है ।बुधवार की सुबह भद्रकाली के पास जैसे ही शराब का ट्रक आकर खड़ा हुआ। वहां मौके पर पुलिस पहुंच गई। नरेंद्र नगर तहसीलदार बी एस तोपवाल भी पहुंचे  साथ ही मौके पर आबकारी इंस्पैक्टर प्रेरणा बिष्ट भी अपनी टीम के साथ मौजूद थी । कुछ देर तक विरोधियों का इंतजार करने के बाद पुलिस वापस लौट गई। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से दो पुलिसकर्मी मौके पर ही छोड़ दिए हैं। ठेकेदार अरविंद राणावत ने बताया कि उन्होंने 9 करोड रुपए में ढालवाला का ठेका लिया है और एक महीने बाद अब जाकर उन्हें मोबाइल ट्रक से शराब बेचने की परमिशन मिली है। उन्हें करीब 1 महीने में 85 लाख रुपए का नुकसान हो गया है। बताया कि ठेका सुबह 10:00 से रात को 10:00 बजे तक ग्राहकों के लिए खुला रहेगा। थाना प्रभारी निरीक्षक मुनिकीरेती आरके सकलानी ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से वज्र वाहन और अतिरिक्त पुलिस फोर्स थाने में मौजूद है। यदि कोई जोर जबरदस्ती करके ठेके का विरोध करता है और उसे बंद कराने की कोशिश करता है तो पुलिस उसे हिरासत में ले लेगी। बताया कि शराब का ठेका सरकार ने आवंटित किया है और सरकार के आदेश का पालन करना पुलिस की ड्यूटी है। उन्होंने विरोधियों से ठेके से दूर रहकर शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। वहीं दूसरी और ओम गोपाल रावत ,हिमांशु बिजल्वाण  के लिए  में खुले मोबाइल ठेके का कुछ महिलाओं ने विरोध किया तो वहीं कुछ लोग शराब का ठेका खोले के ले के समर्थन में नारेबाजी करते देखे गए जिसको लेकर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई मौके की नजाकत को देखते हुए जिलाधिकारी लक्ष्मी राज चौहान तथा पुलिस क्षेत्राधिकारी जेपी जुयाल मैं फोर्स के मौके पर पहुंचे और स्थिति को काबू में किया। वहीं कुछ लोगों ने शराब की बोतलों में आग भी लगाई। इस दौरान पुलिस ने शराब के ठेके का विरोध कर रहे 8 लोगों को गिरफ्तार भी किया जिसमें हिमांशु बिजल्वाण गोपाल रावत मदन सकलानी सहित अन्य लोग भी थे।
ऋषिकेश 01 जून। नगर पालिका जौंंक स्वर्ग आश्रम के पालिका अधिशासी अधिकारी द्वारा पर्यावरण  मित्रों का मानसिक उत्पीड़न किए जाने को लेकर सफाई कर्मचारियों ने अपना आंदोलन शुरू कर दिया है ।जिसके चलते आज शुक्रवार की सुबह से अपने कार्य का बहिष्कार कर पालिका के कार्यालय के बाहर कर्मचारियों ने धरना दिया ।सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार का कहना था कि अधिशासी अधिकारी पर्यावरण मित्रों का जेईई के कहने पर मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं जिसके कारण कर्मचारियों में रोष व्याप्त है उन्होंने कहा कि जब तक वह कर्मचारियों का मानसिक उत्तपीडन बंद नहीं करेंगे जब तक सभी कर्मचारी कार्य का बहिष्कार कर आंदोलन व धरना देंंगे।  शुक्रवार को धरना देने वालों में विनोद भारती, रवि कुमार ,अजय कुमार,  विशाल कुमार, राजेश कुमार ,पुरुषोत्तम ,चंपा देवी, सुमन देवी, कमला देवी, निर्मला देवी ,सरोज देवी सहित अन्य पर्यावरण मित्र कर्मचारी भी धरने पर उपस्थित थे।

 
एडीजी लॉ एंड ऑडर ने जारी किया सर्कुलर
ऋषिकेश,26मई उत्तराखंड पुलिस महानिरीक्षक पुलिस थानों पर पीड़ितों की रिपोर्ट न लिखे जाने को गंभीरता से लेते हुए पीड़ितों को बहुत बड़ी राहत दिए जाने का निर्णय लिया है जिसके चलते उन्होंने मातहतों को चेतावनी देते हुए कहा कि अब सभी थानों पर पीड़ित पक्षों की शिकायतों को दर्ज न किये जाने पर कार्यवाही भी होगी अशोक कुमार का कहना था कि प्रायः पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड पर जनता से यह शिकायत प्राप्त हो रही है की उनके शिकायती प्रार्थना-पत्रों को थाने पर रिसीव नहीं किया जाता है। इस पर  अशोक कुमार एडीजी लॉ एंड ऑडर द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होने प्रदेश के सभी जनपद प्रभारियों को सर्कुलर जारी कर आदेशित किया है कि थानों पर प्राप्त होने वाले शिकायती प्रार्थना-पत्रों को रिसीव न करने की कार्य प्रणाली को समाप्त किया जाये, भविष्य में जिस थाने से पीड़ित के शिकायती प्रार्थना-पत्र को रिसीव न करने की शिकायत प्राप्त होती है, तो उस थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जाये। इसके लिए अपर पुलिस अधीक्षकों व क्षेत्राधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाये। अशोक कुमार ने कहा की पीड़ित को पुलिस की कार्यवाही से न्याय की उम्मीद रहती है। यदि थाने पर पीड़ित के शिकायती प्रार्थना पत्र को रिसीव कर लिया जाता है और सक्षम अधिकारी द्वारा पीड़ित के प्रार्थना-पत्र की जांच कर वैधानिक कार्यवाही कि जाती है, तब पीड़ित का पुलिस पर विश्वास बढ़ता है और पुलिस की इस त्वरित कार्यवाही से पुलिस की अच्छी छवि बनती है।
पुलिस के रिकवरी वाहन से वाहन चालकों में मचा हड़कंप
ऋषिकेश। नगर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पुलिस महानिरिक्षक द्वारा दिए गए विशेष पुलिस को आदेश के अनुसार यातायात पुलिस के अभियान को लेकर वाहन चालकों में हड़कंप मचा हुआ है जिसके चलते रिकवरी वैन द्वारा 1 सप्ताह के अंदर 3 दर्जन से अधिक वाहनों को नगर कोतवाली में खड़ा कर दिया है जिससे वहां सड़कों के किनारे अवैधानिक  रूप से सड़कों पर खड़े करने वाले वाहन चालकों में हड़कंप मचा है रिकवरी वाहन के चालक मंगल सिंह,टीएस एस आई सतेंद्र के नेतृत्व में चलाए जा रहे अवैध रूप से  सड़कों पर खड़े करने वाले वाहनों के विरुद्ध अभियान की सभी नगर वासियों ने सराहना करते हुए इस अभियान को और गति दिए जाने की मांग की है देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने कहा कि पुलिस को अपना अभियान पूरे नगर मे चलाया जाना चाहिए जिससे नगर की यातायात व्यवस्था में सुधार हो सके।
देहरादून। सहस्त्रधारा रोड के ग्राम डाण्डा लखौण्ड में दबंग भू-माफिया द्वारा अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति की जमीन पर अतिक्रमण कर उसे घर से बेघर करने का षड़यंत्र किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस प्रशासन भी इस मामले में पीड़ित की शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नही कर रहे हैं। 
जिससे उक्त व्यक्ति इस समय बेहद मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहा है। ग्राम डाण्डा लखौण्ड निवासी जगदीश प्रसाद जग्गी ने जिलाधिकारी से की शिकायत में बताया कि न्याय पंचायत गुजराडा परगना परवादून का वो मूल निवासी है तथा अनुसूचित जाति का व्यक्ति है। पिछले काफी समय से एक भू-माफिया उसकी निजी भूमि पर नजरे गढ़ाए हुए है। क्योंकि उसका खेत जिसका खसरा न. 432 रकबा-160 है.उक्त भू-माफिया की प्लाटिंग के सामने आ रहा है जिस पर भूमापिफया द्वारा जबरन अतिक्रमण कर लिया गया है तथा उसने मेरे घर की जड़ तक जेसीबी चलाकर उसको खोद डाला, चूंकि उनका मकान एक ढांगनुमा जमीन पर स्थित है जिसकी दूरी करीब 2 फिट बची है और नीचे 40 फीट से अधिक कटिंग कर दी गयी इसके बावजूद कईं बार लिखित शिकायत करने के बावजूद भी भूमाफिया के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होने आरोप लगाया कि उक्त भूमाफिया खुद को पुलिस के एक बड़े अधिकारी का रिश्तेदार बताकर उनके नाम से डरा-धमकाता है कि वो उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। जिससे उन्हे बेघर होने के साथ ही जान-माल के नुकसान का खतरा भी बना हुआ है। इस संबंध में शीघ्र ही उचित कार्रवाई कर न्याय प्रदान किया जाए। जबकि उक्त भूमाफिया इस जमीन का स्वामी भी नहीं है इसके बावजूद किसकी शह पर वो वहां प्लाटिंग कर रहा है यह भी जांच का विषय है।